अमेरिका ने भारतीय सोलर उपकरणों पर **200%** से ज्यादा का भारी-भरकम टैक्स लगा दिया है, जिससे एक्सपोर्ट बंद होने के कगार पर है। इस बड़े बदलाव के बाद भारतीय कंपनियां अब अपनी मैन्युफैक्चरिंग को अमेरिका शिफ्ट करने या घरेलू बाजार पर ध्यान देने की रणनीति बना रही हैं।
अमेरिका का नया फरमान और गहराता संकट
अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी के कारण भारतीय सोलर कंपनियों के लिए रास्ता लगभग बंद हो गया है। हाल के 18 महीनों में इस सेक्टर में $16 बिलियन का निवेश हुआ है, लेकिन अब 200% से ज्यादा टैक्स के बाद एक्सपोर्ट पूरी तरह ठप पड़ सकता है।
कैपेसिटी और डोमेस्टिक सप्लाई का गणित
भारतीय कंपनियों ने मॉड्यूल की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बढ़ाकर 242.7 GW और सेल को 40.5 GW तक पहुंचा दिया है। एक्सपोर्ट में रुकावट से भारत के घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे कंपनियों के बीच प्राइस वॉर छिड़ने और प्रॉफिट मार्जिन कम होने का डर बना हुआ है। हालांकि, सरकार की ALMM पॉलिसी घरेलू कंपनियों को काफी हद तक सुरक्षा दे रही है।
कंपनियों की नई स्ट्रैटेजी
टैरिफ से बचने के लिए Waaree Energies और Inox Wind जैसी बड़ी कंपनियां अब अमेरिका में ही मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने पर विचार कर रही हैं। वहीं, Indosol Solar जैसी कंपनियां नॉन-चाइनीज वेफर्स (wafers) की सप्लाई पर फोकस कर रही हैं ताकि बाजार में कॉम्पिटिटिव बनी रहें।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को अब कंपनियों के बैलेंस शीट पर नजर रखनी होगी, क्योंकि अमेरिका में प्लांट लगाने का खर्च कर्ज बढ़ा सकता है। आने वाली तिमाही नतीजों में कंपनियों की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन और नई कैपिटल स्पेंडिंग पर मैनेजमेंट की कमेंट्री देखना सबसे अहम होगा।
