साल 2026 की पहली छमाही में भारत ने **155.25 बिलियन क्यूबिक फीट** अमेरिकी LNG का रिकॉर्ड आयात किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव और कतर में सप्लाई बाधित होने के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।
भारत की ऊर्जा आयात रणनीति में साल 2026 की पहली छमाही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। देश अब अपनी जरूरतों के लिए अमेरिका से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) पर तेजी से निर्भर हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार, इस साल की पहली छमाही में आयात 155.25 बिलियन क्यूबिक फीट तक पहुंच गया है, जो दो साल पहले की समान अवधि के 132.95 बिलियन क्यूबिक फीट से काफी ज्यादा है।
मिडिल ईस्ट में सप्लाई चेन का संकट
इस बदलाव की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जारी संघर्ष है, जिसने एनर्जी टैंकरों की आवाजाही को मुश्किल बना दिया है। वहीं, अप्रैल 2026 में QatarEnergy की Ras Laffan सुविधा पर हुए हमले ने आग में घी का काम किया। यह दुनिया की सबसे बड़ी लिक्विफिकेशन साइट्स में से एक थी, जिससे भारत को बड़ी मात्रा में गैस मिलती थी। नतीजतन, मई-जुलाई 2026 के दौरान कतर से भारत का LNG आयात साल-दर-साल 91% तक गिर गया, जिससे भारतीय आयातकों को तुरंत नए विकल्पों की तलाश करनी पड़ी।
भारतीय कंपनियों पर क्या होगा असर?
गैस पर निर्भर उद्योगों जैसे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD), फर्टिलाइजर और पावर सेक्टर के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। हालांकि, अमेरिकी गैस से उन्हें डेस्टिनेशन फ्लेक्सिबिलिटी तो मिलती है, लेकिन स्पॉट मार्केट की महंगी गैस उनके मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। अगर कंपनियां बढ़ती लागत को ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो इसका सीधा असर उनके नेट प्रॉफिट पर दिखेगा।
निवेशकों को GAIL (India), Petronet LNG, Indraprastha Gas, Mahanagar Gas और Adani Total Gas जैसे शेयरों पर नजर रखनी चाहिए।
