भारत को रूसी तेल आयात पर अमेरिका से बड़ी राहत मिली है। सरकार को अब रूसी क्रूड पर संभावित **100%** टैरिफ का सामना नहीं करना पड़ेगा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया है कि रूस से तेल मंगाने को लेकर अमेरिका का कोई दबाव नहीं है, जो फिलहाल भारत की कुल सप्लाई का **44%** है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, भारत ने अमेरिका से ऊर्जा आयात को लेकर एक महत्वपूर्ण छूट (Waiver) हासिल कर ली है। 'ग्राहम एक्ट' (Graham Act) के तहत रूसी कच्चे तेल पर लगने वाले 100% टैरिफ के खतरे को टाल दिया गया है। यह फैसला भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इससे अचानक लगने वाले भारी-भरकम जुर्माने का डर खत्म हो गया है।\n\n### रिफाइनरी कंपनियों पर असर\nवर्तमान में भारत अपनी कुल जरूरतों का लगभग 44% रूस से पूरा करता है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), BPCL और HPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए यह छूट ऑपरेशनल स्टेबिलिटी प्रदान करती है। यदि ये टैरिफ लागू हो जाते, तो इन कंपनियों की कच्चे माल की लागत में भारी इजाफा होता, जिससे उनके मुनाफे और मार्जिन पर तगड़ा असर पड़ सकता था।\n\n### कूटनीति और भविष्य की चुनौतियां\nयह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा प्रस्तावित है, जिसमें वे जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी का दौरा भी करेंगे। हालांकि यह फैसला रिफाइनिंग सेक्टर के लिए सकारात्मक है, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि कूटनीतिक छूटों पर निर्भरता एक रिस्क भी है। भविष्य में अमेरिकी नीतियों में बदलाव कंपनी की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। निवेशकों को रिफाइनरी के ग्रॉस मार्जिन और ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
