सरकार ने पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी है, जबकि डीजल और ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) पर टैक्स बढ़ा दिया है। इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में फ्यूल की सप्लाई को स्थिर रखना है।
क्या बदला है टैक्स स्ट्रक्चर?
वित्त मंत्रालय ने रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में बड़ा बदलाव किया है। पेट्रोल पर पहले ₹2.50 प्रति लीटर की स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी थी, जिसे अब पूरी तरह हटा लिया गया है। वहीं, दूसरी ओर डीजल पर एक्सपोर्ट लेवी को ₹3 प्रति लीटर बढ़ा दिया गया है, जिससे नई दर ₹11.50 प्रति लीटर हो गई है। इसी तरह, ATF पर भी टैक्स को ₹10.50 से बढ़ाकर ₹11 प्रति लीटर कर दिया गया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इसे 'विंडफॉल टैक्स' के रूप में देखा जा रहा है। जब ग्लोबल मार्केट में फ्यूल के दाम बढ़ते हैं, तो रिफाइनर कंपनियां बाहर ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए घरेलू बाजार से फ्यूल एक्सपोर्ट करने लगती हैं। इस टैक्स के जरिए सरकार इन कंपनियों के मुनाफे पर लगाम लगाती है और देश के अंदर फ्यूल की किल्लत नहीं होने देती।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
इस फैसले का सीधा असर Reliance Industries जैसी बड़ी प्राइवेट रिफाइनरी कंपनियों के साथ-साथ Indian Oil Corporation (IOC), Bharat Petroleum Corporation (BPCL) और Hindustan Petroleum Corporation (HPCL) पर पड़ेगा। एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से इन कंपनियों के प्रति लीटर मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल, मिडिल ईस्ट के तनाव और ग्लोबल ऑयल प्राइस की अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि सरकार आगे भी कीमतों में बदलाव कर सकती है।
