साल **2025** में रूस से भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट **$43 बिलियन** तक पहुंच गया है। **2026** की शुरुआत में वॉल्यूम में **25%** की बढ़ोतरी दिखी है। हालांकि रिफाइनर्स को इससे फायदा हो रहा है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ और सप्लाई चेन की बाधाएं रिस्क बढ़ा रही हैं।
रूस भारत के लिए एक मुख्य एनर्जी पार्टनर बनकर उभरा है। साल 2025 में क्रूड ऑयल का इंपोर्ट $43 बिलियन रहा और 2026 की पहली छमाही में इसमें 25% का इजाफा दर्ज किया गया है। Indian Oil Corporation और Nayara Energy जैसी कंपनियां गुजरात के वाडिनार रिफाइनरी जैसे संयंत्रों में इस सस्ते कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं, जिससे इनपुट कॉस्ट मैनेज करने में बड़ी मदद मिली है।
रणनीतिक निवेश और जोखिम
भारत-रूस का रिश्ता सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है। ONGC Videsh, Oil India और Indian Oil Corporation ने रूस के Sakhalin-1, Vankorneft और Taas-Yuriakh जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी ले रखी है। इसके अलावा, Kudankulam न्यूक्लियर पावर प्लांट भी दोनों देशों के बीच एक बड़ा प्रोजेक्ट है।
सामने आ रही चुनौतियां
निवेशकों को अब सतर्क रहने की जरूरत है। रूस में रिफाइनिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए ड्रोन हमलों के कारण सप्लाई में बाधाएं आ रही हैं। साथ ही, चीन की ओर से रूसी तेल की आक्रामक खरीदारी ने भारतीय रिफाइनर्स के लिए मुकाबला कठिन बना दिया है। सबसे बड़ा रिस्क भू-राजनीतिक (Geopolitical) है; अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी का डर और Nayara Energy जैसी कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों (Sanctions) के बीच काम करना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल, Vostok Oil क्लस्टर और भविष्य के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स पर नजर रखना निवेशकों के लिए जरूरी होगा।
