भारत में PM Surya Ghar योजना के तहत रेजिडेंशियल रूफटॉप सोलर कैपेसिटी **16 GW** के पार पहुंच गई है। हालांकि, अगस्त महीने में नए इंस्टॉलेशन में जुलाई के मुकाबले **11.6%** की गिरावट दर्ज की गई है।
भारत के रेजिडेंशियल रूफटॉप सोलर सेक्टर ने अगस्त 2026 में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। 'PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana' के तहत कुल कैपेसिटी 16,000 MW के आंकड़े को पार कर गई है। यह सरकारी पहल घरों को 'प्रो्यूमर' (Prosumer) मॉडल की ओर ले जा रही है, जहां परिवार न केवल बिजली का उपभोग कर रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच भी रहे हैं। अब तक इस स्कीम के तहत 8 करोड़ से ज्यादा आवेदन प्रोसेस हुए हैं और 54 लाख से अधिक परिवार इससे जुड़ चुके हैं, जिसके लिए सरकार ने ₹30,885 करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी दी है।
इंस्टॉलेशन में सुस्ती की वजह
इस उपलब्धि के बावजूद, अगस्त में नई कैपेसिटी जुड़ने की रफ्तार थोड़ी धीमी रही। अगस्त में 1,407 MW नई कैपेसिटी जोड़ी गई, जो जुलाई के 1,592 MW के मुकाबले 11.6% कम है। राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश 228.95 MW के साथ सबसे आगे रहा, जिसके बाद महाराष्ट्र (212.51 MW) और आंध्र प्रदेश (192.39 MW) का नंबर आता है।
इंडस्ट्री के सामने चुनौतियां
इंस्टॉलेशन में आई इस कमी के पीछे कई बड़े कारण हैं:
- सप्लाई चेन का दबाव: सोलर मॉड्यूल और सेल मैन्युफैक्चरिंग के बीच तालमेल की कमी और DCR (Domestic Content Requirements) के सख्त नियमों के कारण कुछ मॉड्यूल्स की उपलब्धता सीमित हो गई है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं।
- लागत का असर: महंगे मॉड्यूल के कारण प्रोजेक्ट्स की कुल लागत बढ़ रही है, जो रेजिडेंशियल कंज्यूमर्स के बजट पर असर डाल रही है।
- ऑपरेशनल बाधाएं: छोटे इंस्टॉलर को फाइनेंसिंग में दिक्कत और कुछ क्षेत्रों में प्रक्रियात्मक देरी भी रफ्तार को धीमा कर रही है।
इन चुनौतियों को देखते हुए, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने अब इनवर्टर निर्माताओं के लिए रियल-टाइम जनरेशन डेटा अनिवार्य कर दिया है। इसका लक्ष्य डेटा में पारदर्शिता लाना है ताकि बिजली उत्पादन का सही अंदाजा लग सके। आने वाले समय में सोलर मॉड्यूल की कीमतों में स्थिरता और सब्सिडी मिलने की रफ्तार ही तय करेगी कि सेक्टर वापस तेज ग्रोथ की पटरी पर कब लौटेगा।
