सितंबर 2026 में भारत ने खाड़ी देशों (West Asia) से क्रूड ऑयल का आयात बढ़ाकर **2.8 मिलियन बैरल** प्रतिदिन कर दिया है। रूसी तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट घटकर मात्र **$1 से $2** प्रति बैरल रह जाने के कारण रिफाइनर्स ने अब कम दूरी वाले और सस्ते सप्लाई रूट को चुनना शुरू कर दिया है।
सितंबर 2026 में भारत की एनर्जी इंपोर्ट स्ट्रैटेजी में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डेटा के अनुसार, खाड़ी देशों से क्रूड का आयात 2.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच गया है। इसका सीधा असर रूस से होने वाले आयात पर पड़ा है, जिसकी हिस्सेदारी अगस्त के 46.6% से गिरकर सितंबर में 33.5% पर आ गई है।
क्यों कम हुआ रूसी तेल का आकर्षण?
पिछले दो सालों तक रूसी क्रूड पर $10 प्रति बैरल से भी ज्यादा का भारी डिस्काउंट मिलता था, जिसके चलते लंबी दूरी के बावजूद इसे खरीदना फायदेमंद था। लेकिन अब यह डिस्काउंट घटकर मात्र $1 से $2 प्रति बैरल के बीच सिमट गया है। मार्जिन कम होने के बाद, भारतीय रिफाइनर्स अब केवल क्रूड की कीमत नहीं, बल्कि 'टोटल लैंडेड कॉस्ट' (कीमत + ट्रांसपोर्ट खर्च) पर ध्यान दे रहे हैं।
खाड़ी देशों की बढ़ी डिमांड
इराक और यूएई (UAE) जैसे देश भारत के काफी करीब हैं, जिससे शिपिंग का समय और फ्रेट खर्च दोनों कम हो जाते हैं। इराक की बात करें, तो अगस्त में वहां से 171,000 बैरल प्रतिदिन का आयात होता था, जो सितंबर में उछलकर करीब 830,000 बैरल प्रतिदिन हो गया है।
इन्वेस्टर्स के लिए अब ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) और रशियन यूराल (Russian Urals) के बीच का स्प्रेड मॉनिटर करना जरूरी होगा। अगर यह डिस्काउंट फिर से बढ़ता है, तो रिफाइनर्स का झुकाव दोबारा रूस की तरफ हो सकता है। फिलहाल, भारत अपनी सप्लाई चेन को बाजार की स्थितियों के अनुसार लचीला बनाए हुए है।
