4 साल बाद ईरान से LPG की वापसी
भारत ने 4 साल के लंबे इंतजार के बाद ईरान से लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) का आयात फिर से शुरू कर दिया है। यह साल 2019 के बाद पहला मौका है जब भारत ने ईरान से ऊर्जा के इस महत्वपूर्ण स्रोत को खरीदा है। अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली अस्थायी ढील के बाद यह कदम उठाया गया है।
प्रतिबंधों में ढील और एनर्जी सिक्योरिटी
साल 2019 में पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के चलते भारत ने ईरान से ऊर्जा खरीदना बंद कर दिया था। अब, टैंकर 'Aurora', जो कथित तौर पर चीन जा रहा था, भारत के पश्चिमी तट पर स्थित बंदरगाह मंगलौर (Mangalore) की ओर बढ़ रहा है। यह शिपमेंट भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बेहद अहम है, खासकर तब जब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में बाधाएं बनी हुई हैं।
सप्लाई और भुगतान का तरीका
आयातित एलपीजी को भारत की तीन बड़ी सरकारी फ्यूल कंपनियों - इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corp), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (Bharat Petroleum Corp), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (Hindustan Petroleum Corp) - को सप्लाई किया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्गो एक ट्रेडर से खरीदा गया था, और भुगतान संभवतः रुपयों में किया गया है। यह भारत द्वारा भुगतान के वैकल्पिक तरीके तलाशने का संकेत देता है। हालांकि, शिपिंग मंत्रालय के एक अधिकारी ने तब ईरान से किसी लोड किए गए कार्गो की जानकारी होने से इनकार किया था।
भारत की LPG खपत
भारत एलपीजी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है, जिसने पिछले साल 3.315 करोड़ टन (33.15 million metric tons) एलपीजी की खपत की थी। इस मांग का लगभग 60% आयात से पूरा होता है, जिसमें पारंपरिक रूप से मध्य पूर्व से सबसे अधिक आपूर्ति होती है। भारत फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फंसे अन्य एलपीजी शिपमेंट को मैनेज करने पर भी काम कर रहा है।