यह कदम मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति की चिंताओं के बीच उठाया गया है। भारत के तेल मंत्रालय ने पुष्टि की है कि रिफाइनरियों ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद की है, जो सात साल में पहली बार हुआ है।
अमेरिका की 30 दिन की छूट
यह अस्थायी छूट 30 दिनों के लिए मान्य है और 19 अप्रैल, 2026 तक लागू रहेगी। इसे वैश्विक आपूर्ति की कमी को कम करने और बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिए लाया गया है। इस छूट के तहत, पहले से ट्रांजिट (Transit) में मौजूद लगभग 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल को बाजार में वापस लाया जा सकेगा। यह भारत के लिए बड़ी राहत है, जो अपनी लगभग 90% कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है और 50% ऊर्जा मध्य पूर्व से प्राप्त करता है।
बाजार में आई उथल-पुथल
वैश्विक कच्चे तेल बाजार में भारी उठापटक देखी जा रही है। एक समय $110 प्रति बैरल से ऊपर चल रहा ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) घटकर लगभग $94-95 पर आ गया, जबकि WTI (West Texas Intermediate) 8 अप्रैल, 2026 को लगभग $95-96 पर लुढ़क गया। यह गिरावट अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम समझौते के बाद आई है, जिसका मकसद होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल का लगभग 20% हिस्सा ले जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने होरमुज से जुड़े संकट को 'वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के इतिहास में सबसे बड़ा खतरा' बताया है, जिससे लगभग 11 मिलियन बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। खाड़ी देशों (Gulf Nations) द्वारा की गई तेल उत्पादन में कटौती, जो अनुमानित रूप से 10-11 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, ने वैश्विक आपूर्ति को और भी कस दिया है।
जोखिमों से भरा रास्ता
हालांकि, यह कदम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होने के बावजूद जोखिम भरा है। यह अमेरिका की अप्रत्याशित नीतियों और क्षेत्रीय शांति पर निर्भर करेगा। 30 दिनों की यह छूट केवल एक अस्थायी समाधान है, कोई दीर्घकालिक योजना नहीं। भारत की आयात पर भारी निर्भरता (कच्चे तेल का 85-90% आयात) और मध्य पूर्व की अस्थिरता इस जोखिम को और बढ़ाती है।
सोसाइटी जेनरल (Societe Generale) के विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे भू-राजनीतिक घटनाक्रम भारत के आर्थिक विकास के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। IMF (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) ने भी बढ़ती महंगाई और धीमी वैश्विक वृद्धि की आशंका जताई है।
आगे क्या?
कीमतें $100 प्रति बैरल से नीचे जाने के बावजूद, विश्लेषकों को उम्मीद है कि ब्रेंट क्रूड आपूर्ति की चिंताओं के कारण $85-90 के बीच स्थिर हो सकता है। IEA का मानना है कि शिपिंग सामान्य होने में देरी होने पर वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधाएं जारी रहेंगी। भारत की लंबी अवधि की रणनीति में आपूर्तिकर्ताओं का विविधीकरण, भंडार बढ़ाना और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को बढ़ावा देना शामिल है।