India Renewables: रिन्यूएबल एनर्जी ने रचा इतिहास, बिजली उत्पादन **100 बिलियन यूनिट** के पार

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Renewables: रिन्यूएबल एनर्जी ने रचा इतिहास, बिजली उत्पादन **100 बिलियन यूनिट** के पार

भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर ने फिस्कल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रिन्यूएबल बिजली का उत्पादन **101 बिलियन यूनिट** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, हालांकि ग्रिड की दिक्कतों के कारण **1.8 बिलियन यूनिट** बिजली बर्बाद भी हुई है।

भारत के पावर सेक्टर ने फिस्कल ईयर 2026-27 की दूसरी तिमाही में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। लार्ज हाइड्रो को छोड़कर, रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन पहली बार 100 बिलियन यूनिट (BU) के आंकड़े को पार कर 101 BU पर पहुंच गया है। अगर इसमें लार्ज हाइड्रो और न्यूक्लियर पावर को भी जोड़ लिया जाए, तो कुल नॉन-फॉसिल फ्यूल जनरेशन 177 BU के रिकॉर्ड स्तर पर है।

पावर ग्रिड और डिमांड का बदलता गणित

इस बढ़त का सीधा असर भारत के पावर ग्रिड मैनेजमेंट पर दिख रहा है। 16 जुलाई, 2026 को पीक इलेक्ट्रिसिटी डिमांड 270 गीगावाट (GW) के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले 18% ज्यादा है। सोलर और विंड पावर के बढ़ते दखल के कारण कोल-फायर्ड थर्मल पावर प्लांट का उपयोग (प्लांट लोड फैक्टर) पिछले दौर के 73% से घटकर 68% रह गया है।

ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती

निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय 'पावर कर्टेलमेंट' है। जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान करीब 1.8 बिलियन यूनिट रिन्यूएबल बिजली बर्बाद हो गई, क्योंकि ट्रांसमिशन ग्रिड इस अतिरिक्त बिजली को ले जाने में सक्षम नहीं था। यह इंफ्रास्ट्रक्चर की एक बड़ी खामी है। रिन्यूएबल कंपनियों के लिए यह सीधा रेवेन्यू का नुकसान है, क्योंकि ग्रिड बाधाओं के कारण वे अपनी पैदा की हुई पूरी बिजली बेच नहीं पा रही हैं।

कोल सप्लाई और रिस्क

भले ही रिन्यूएबल कैपेसिटी बढ़ रही है, लेकिन भारत अभी भी अपनी दो-तिहाई बिजली के लिए कोयले पर निर्भर है। 30 सितंबर, 2026 तक पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक जरूरत के मुकाबले महज 36% रह गया था। कोयला सप्लाई चेन में कोई भी रुकावट देश के पावर सिस्टम को मुश्किल में डाल सकती है और ग्रिड को फिर से महंगे विकल्पों की ओर झुकना पड़ सकता है।

निवेशकों के लिए नजर रखने वाली बातें

आगे चलकर इस सेक्टर की परफॉर्मेंस दो मुख्य बातों पर निर्भर करेगी:

  1. ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर: ट्रांसमिशन लाइनों में निवेश की रफ्तार कितनी तेज है ताकि बिजली की बर्बादी को रोका जा सके।
  2. कोल सप्लाई चेन: थर्मल पावर अभी भी ग्रिड के लिए 'बेस-लोड' की तरह काम करता है, इसलिए कोयले की आपूर्ति और स्थिरता सेक्टर की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.