Renewable Energy: 5 महीनों में ही पूरा हुआ सालाना लक्ष्य का 55%, पावर सेक्टर में बड़ी हलचल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Renewable Energy: 5 महीनों में ही पूरा हुआ सालाना लक्ष्य का 55%, पावर सेक्टर में बड़ी हलचल

भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच ही सेक्टर ने **177.66 बिलियन यूनिट** बिजली बनाकर सालाना लक्ष्य का **55%** हासिल कर लिया है, हालांकि पावर ग्रिड में अभी भी कोयले का दबदबा कायम है।

ग्रीन एनर्जी की रफ्तार

सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (Central Electricity Authority) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चालू फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती पांच महीनों में ग्रीन एनर्जी प्रोडक्शन में जबरदस्त उछाल आया है। अप्रैल से अगस्त 2026 तक रिन्यूएबल सेक्टर ने 177.66 बिलियन यूनिट बिजली पैदा की है, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि देश 325 बिलियन यूनिट के सालाना टारगेट को आसानी से पार कर लेगा।

पावर ग्रिड में हिस्सेदारी

अगर इसमें हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स को भी जोड़ दें, तो कुल जनरेशन 253.57 बिलियन यूनिट तक पहुंच जाता है। यह भारत की कुल 888.53 बिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का 28.5% है। गौर करने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा पूरे साल के लिए अनुमानित 24.2% से काफी ज्यादा है।

हाइड्रो सेक्टर का खेल

हाइड्रो सेगमेंट पूरी तरह से वेदर पैटर्न और हाइड्रोलॉजिकल साइकिल पर निर्भर है। अगस्त महीने में हाइड्रो आउटपुट में जुलाई के मुकाबले 16.7% का उछाल दिखा, जबकि इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 52.06 गीगावाट पर स्थिर रही। इसका मतलब साफ है कि यह बढ़ोतरी नए इंफ्रास्ट्रक्चर के बजाय अच्छी बारिश और जल प्रवाह का नतीजा है।

कोयले का दबदबा और चुनौतियां

ग्रीन एनर्जी की प्रगति के बावजूद, थर्मल पावर ग्रिड का मुख्य आधार बना हुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए कोयला आधारित पावर 1.41 ट्रिलियन यूनिट यानी कुल उत्पादन का लगभग 69% रहने का अनुमान है। यह दिखाता है कि ट्रांजिशन अभी शुरुआती दौर में है और ग्रिड की स्टेबिलिटी के लिए अभी भी बेस-लोड पावर की जरूरत है।

नई टेक्नोलॉजी की ओर कदम

सोलर और विंड पावर की अस्थिरता से निपटने के लिए NTPC जैसी कंपनियां अब कंसंट्रेटेड सोलर पावर (Concentrated Solar Power) जैसी एडवांस स्टोरेज टेक्नोलॉजी पर दांव लगा रही हैं। Khavda सोलर पार्क जैसे बड़े साइट्स पर इन सॉल्यूशंस की टेस्टिंग जारी है, जो भविष्य में ग्रिड बैलेंसिंग और ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। निवेशकों की नजर अब यूटिलिटीज की स्टोरेज-रेडी टेक्नोलॉजी अडॉप्शन और सरकार की ग्रिड स्टेबिलिटी पॉलिसीज पर होनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.