Russian Oil: अमेरिकी कानून के डर से बैकफुट पर भारतीय रिफाइनर्स, घटाया कच्चा तेल आयात

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Russian Oil: अमेरिकी कानून के डर से बैकफुट पर भारतीय रिफाइनर्स, घटाया कच्चा तेल आयात

सितंबर 2026 में 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act' लागू होने के बाद, भारतीय रिफाइनर्स ने रूस से होने वाले क्रूड ऑयल आयात को घटाकर **1.75 मिलियन बैरल प्रति दिन** कर दिया है।

18 सितंबर को 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act' के लागू होने के बाद भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा खरीदने वाले शीर्ष पांच खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि अभी ये टैरिफ लागू नहीं हुए हैं, लेकिन इससे पैदा हुए भू-राजनीतिक जोखिम ने कंपनियों को रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए मजबूर कर दिया है।

क्यों कम हो रहा है आकर्षण?

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण रूसी तेल पर मिलने वाले डिस्काउंट का कम होना है। कभी जो डिस्काउंट काफी मोटा होता था, वह अब घटकर मात्र $1 से $2 प्रति बैरल रह गया है। मार्जिन कम होने के कारण अब रूसी तेल का आयात करना कंपनियों को आर्थिक रूप से कम आकर्षक लगने लगा है।

सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव

आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में रूस से आयात घटकर अप्रैल के बाद के सबसे निचले स्तर 1.75 मिलियन बैरल प्रति दिन पर आ गया है। अब रिफाइनर्स मध्य पूर्व, अमेरिका और अफ्रीका जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए चुनौती यह है कि अमेरिका के साथ भारत का सालाना व्यापार $86.5 बिलियन का है। दूसरी ओर, गैर-रूसी तेल स्रोतों की तरफ बढ़ने से शिपिंग और लॉजिस्टिक लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर कंपनियों के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) पर पड़ सकता है। आने वाले समय में कंपनियों की दक्षता ही तय करेगी कि वे इस ऊर्जा संकट को कितनी मजबूती से झेल पाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.