हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव के बीच, भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए घरेलू LPG उत्पादन में रोजाना **4,000 टन** तक का इजाफा किया है।
उत्पादन बढ़ाने की रणनीतिक मजबूरी
भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण घरेलू रिफाइनरियों ने अपने उत्पादन स्तर को 37,000 से 38,000 टन के बेस लेवल से बढ़ाकर अब 4,000 टन अतिरिक्त प्रतिदिन कर दिया है। ऐतिहासिक रूप से भारत अपनी LPG जरूरतों का 90% हिस्सा हॉर्मुज के रास्ते मंगवाता रहा है, लेकिन अब निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका से होने वाले आयात को 10% से बढ़ाकर 50% से ऊपर ले जाया गया है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
उत्पादन बढ़ाना तो ठीक है, लेकिन इसका असर रिफाइनरियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ सकता है। नॉर्थ अमेरिका से कच्चा माल मंगाने पर फ्रेट कॉस्ट बढ़ जाती है, जो मार्जिन पर दबाव डालती है। इसके अलावा, अगर रिफाइनरियां LPG उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करती हैं, तो पेट्रोकेमिकल (प्लास्टिक और केमिकल रॉ मटेरियल) जैसे अधिक मुनाफे वाले उत्पादों का आउटपुट गिर सकता है। पीक स्थितियों में उत्पादन 63,810 टन प्रतिदिन तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
डिमांड में 'डिस्ट्रक्शन'
बाजार में फिलहाल सप्लाई सीमित है, जिसका सीधा असर मांग पर दिखा है। अगस्त 2026 में LPG खपत में 17% की सालाना गिरावट दर्ज की गई है। सबसे बड़ी गिरावट औद्योगिक क्षेत्र में देखी गई, जहां जुलाई में बल्क LPG खपत में 80% की भारी कमी आई। अब कई कंपनियां पाइप नेचुरल गैस, डीजल और वुड पेलेट्स जैसे विकल्पों की ओर शिफ्ट हो रही हैं, जिसे एक्सपर्ट्स 'डिमांड डिस्ट्रक्शन' के रूप में देख रहे हैं।
