देश में बिजली संकट को टालने के लिए भारत सरकार ने कोयले की सप्लाई बढ़ाकर **2.6 मिलियन टन** प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दी है। इसके बावजूद, देश के **96 पावर प्लांट्स** में कोयले का स्टॉक खतरनाक स्तर तक गिर गया है, जिससे ग्रिड पर दबाव बना हुआ है।
बिजली ग्रिड पर बढ़ता दबाव
भारतीय पावर सेक्टर फिलहाल मांग और सप्लाई के बड़े अंतर से जूझ रहा है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के 96 पावर प्लांट्स में अब 3 दिन से भी कम का कोयला स्टॉक बचा है। यह स्थिति सितंबर के मध्य में 60 प्लांट्स के मुकाबले कहीं ज्यादा गंभीर है। हालांकि, सरकार का दावा है कि 2.6 मिलियन टन की रोजाना सप्लाई अब तक का उच्चतम स्तर है, जिसका मकसद ग्रिड को किसी भी बड़े फेलियर से बचाना है।
क्यों बढ़ रही है बिजली की मांग?
देश में पीक इलेक्ट्रिसिटी डिमांड में पिछले साल के मुकाबले 45 से 50 गीगावाट का भारी उछाल आया है। इसके पीछे मुख्य वजहें भीषण गर्मी और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में आई तेजी हैं। क्लाइमेट चेंज और 'एल नीनो' (El Nino) की वजह से कम बारिश हुई है, जिसका सीधा असर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स की क्षमता पर पड़ा है। नतीजतन, थर्मल पावर प्लांट्स पर बिजली पैदा करने का बोझ पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।
गुजरात में हालात पर नजर
प्रमुख इंडस्ट्रियल हब होने के नाते गुजरात सरकार भी अलर्ट पर है। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में कोयले की कोई कमी नहीं है, लेकिन वहां स्थानीय प्रशासन ने फैक्ट्रियों को शाम के पीक आवर्स के दौरान बिजली खपत कम करने की सलाह दी है। सरकार का पूरा ध्यान अब डिस्ट्रीब्यूशन की दिक्कतों को दूर करने पर है, ताकि मानसून से प्रभावित माइनिंग क्षेत्रों से कोयले की सप्लाई में कोई रुकावट न आए।
