क्यों बढ़ रही है कोयले की मांग?
इस साल गर्मी रिकॉर्ड तोड़ रही है और साथ ही प्राकृतिक गैस की सप्लाई में भी कमी देखी जा रही है। ऐसे में, बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत कोयले पर ज्यादा निर्भर होने वाला है। फाइनेंशियल ईयर 2027 में कोयले की कुल मांग 906 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले साल यानी FY26 के 826 मिलियन टन से काफी ज्यादा है। कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स से बिजली का उत्पादन भी 13.3% बढ़कर 341 बिलियन यूनिट्स तक पहुंचने की उम्मीद है।
रिकॉर्ड इन्वेंटरी और पीक डिमांड की तैयारी
चिंता की बात यह है कि कोयले का कुल स्टॉक, जिसमें ट्रांजिट और पिटहेड स्टॉक शामिल है, रिकॉर्ड स्तर पर 224 मिलियन टन पहुंच गया है। यह स्टॉक खासकर मई-जून के महीने में पीक डिमांड को पूरा करने के लिए रखा जा रहा है। अनुमान है कि मई-जून में बिजली की अधिकतम मांग 271 गीगावाट तक जा सकती है, जो पिछले साल के 243 गीगावाट से काफी अधिक है। इस बढ़ी हुई मांग का एक बड़ा कारण भीषण गर्मी है, जो बिजली की खपत को बढ़ा रही है। साथ ही, गैस आधारित पावर कैपेसिटी में 8-10 गीगावाट की कमी आने का भी अनुमान है।
रिन्यूएबल एनर्जी के बीच कोयले की अहमियत
जहां भारत रिन्यूएबल एनर्जी, खासकर सोलर पावर पर तेजी से काम कर रहा है और स्थापित क्षमता में इसका हिस्सा 40% तक पहुंच गया है, वहीं हकीकत यह है कि अभी भी कुल बिजली उत्पादन का 76% से ज्यादा हिस्सा कोयले से ही आ रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी की वास्तविक उत्पादन में हिस्सेदारी अभी भी 14% के आसपास ही है। ऐसे में, कोयला अभी भी देश की बिजली व्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है, खासकर बेसलोड पावर और ग्रिड स्टेबिलिटी बनाए रखने के लिए।
गैस की कमी और ग्लोबल सप्लाई का असर
गैस आधारित पावर प्लांट की कम उपलब्धता और इंपोर्ट की ऊंची कीमतों के चलते, ये प्लांट या तो बंद पड़े हैं या ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं। इससे भी कोयले पर निर्भरता और बढ़ी है। पश्चिम एशिया में एनर्जी मार्केट की दिक्कतों ने नेचुरल गैस और एलएनजी की सप्लाई को और टाइट कर दिया है, जिससे इंपोर्टेड कोयले की कीमतें भी बढ़ी हैं।
भविष्य की चुनौतियाँ और निवेश
सरकार 2027 तक कोयला उत्पादन को बढ़ाकर 1.4 बिलियन टन प्रति वर्ष करने का लक्ष्य रख रही है। वहीं, 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी का लक्ष्य है। आने वाले दशक में भारत के पावर सेक्टर में ₹40 लाख करोड़ के निवेश का अनुमान है। हालांकि, कोयले पर भारी निर्भरता वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चिंताएं पैदा करती है। रिन्यूएबल एनर्जी की रुक-रुक कर होने वाली सप्लाई ग्रिड को इंटीग्रेट करने में चुनौतियां पेश करती है। साथ ही, कोयले के भारी उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टोरेज की कमी भी एक बड़ी चिंता है।