Data Center Power Outlook: बिजली की डिमांड में भारी उछाल, सरकार ने लक्ष्य बढ़ाकर किया **26 GW**

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AuthorNeha Patil|Published at:
Data Center Power Outlook: बिजली की डिमांड में भारी उछाल, सरकार ने लक्ष्य बढ़ाकर किया **26 GW**

भारत में AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के बढ़ते चलन के बीच पावर मिनिस्ट्री ने डेटा सेंटर की बिजली खपत का अनुमान लगभग दोगुना कर दिया है। वित्त वर्ष 2031-32 तक अब यह डिमांड **26.3 GW** रहने का अनुमान है, जो पहले **13.56 GW** था।

बिजली की बढ़ती जरूरत और ग्रिड पर दबाव

पावर मिनिस्ट्री के इस बड़े बदलाव से साफ है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने के लिए पावर ग्रिड को भारी अपग्रेड की जरूरत होगी। 2031-32 तक देश की कुल पीक इलेक्ट्रिसिटी डिमांड 388 GW को पार करने की उम्मीद है। यह स्थिति सीधे तौर पर पावर प्रोड्यूसर्स और ट्रांसमिशन कंपनियों जैसे NTPC, Tata Power, और Power Grid Corporation of India के लिए कैपेसिटी विस्तार के नए दरवाजे खोल रही है। निवेशकों की नजरें इस बात पर हैं कि ये कंपनियां कैसे बढ़ती मांग और रिन्यूएबल एनर्जी (Green Energy) की जरूरतों को एक साथ पूरा करती हैं।

डेटा सेंटर कंपनियों के लिए चुनौतियां

सिर्फ जमीन या फाइबर कनेक्टिविटी हासिल करना अब काफी नहीं है। Adani Enterprises, Tata Communications, और Bharti Airtel (Nxtra) जैसी कंपनियों को अब जटिल एनर्जी-प्रोक्योरमेंट फ्रेमवर्क और ग्रीन पावर की ऊंची लागत से निपटना होगा। NASSCOM ने भी चेतावनी दी है कि बिजली, पानी और फाइबर के लिए इंटीग्रेटेड प्लानिंग न होने से प्रोजेक्ट्स की शुरुआत में देरी हो सकती है, जो सीधे तौर पर इन कंपनियों के मुनाफे और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन को प्रभावित कर सकता है।

आगे क्या देखें?

मार्केट की नजर अब इस बात पर है कि राज्य सरकारें 'डिमांड-रिस्पॉन्स फ्रेमवर्क' को कैसे लागू करती हैं, जिससे डेटा सेंटर ग्रिड की स्थितियों के हिसाब से बिजली का इस्तेमाल कर सकें। निवेशकों को ग्रीन टैरिफ पॉलिसी और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही फैक्टर्स डेटा सेंटर डेवलपर्स की सफलता तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.