बढ़ती कीमतों के बीच ऊर्जा सुरक्षा की ओर भारत
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल की कीमतों में अस्थिरता के बीच, भारत ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और 100% इथेनॉल ईंधन को अपनाने की अपनी योजना को तेज़ी से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा स्वतंत्रता हासिल करना, ₹10.9 लाख करोड़ के विशाल आयात बिल को कम करना, आर्थिक स्थिरता को मज़बूत करना और अस्थिर तेल बाज़ारों से उत्पन्न होने वाले मुद्रास्फीति के दबाव को कम करना है।
इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों को बढ़ावा
सरकार निजी ऑपरेटरों को इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु एक बड़ी प्रोत्साहन योजना पर विचार कर रही है, जिसका अनुमान $1 बिलियन से अधिक है। यह एक दशक तक चलने वाली पहल है जो विशेष रूप से कमर्शियल वाहनों पर केंद्रित है, जो कि डीजल के बड़े उपभोक्ता हैं। प्रस्तावित लाभों में प्रति वाहन ₹15 लाख तक की ब्याज सब्सिडी और ऋण के लिए आंशिक क्रेडिट गारंटी शामिल हो सकती है। इस पहल से Tata Motors, Olectra Greentech, और Ashok Leyland जैसी कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है, जबकि 'PM E-DRIVE' पहल सीधे इलेक्ट्रिक ट्रकों को समर्थन देगी।
इथेनॉल इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज़ विस्तार
इसी के साथ, भारत अपने इथेनॉल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में भी तेज़ी ला रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय अगले दो वर्षों के भीतर 5,000 E100 (100% इथेनॉल) ईंधन स्टेशनों की स्थापना को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है, जिसकी शुरुआत प्रमुख शहरों में 150 स्टेशनों से होगी। इसके उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए, E100 की कीमत पेट्रोल की तुलना में 30% कम रखी जा सकती है, साथ ही संभावित कर और GST छूट भी मिल सकती है। Maruti Suzuki और Tata Motors जैसी ऑटो कंपनियां पहले से ही फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) वाहनों के प्रोटोटाइप विकसित कर रही हैं, जिनका लक्ष्य 2026 के अंत तक लॉन्च करना है। सरकार ने 30% तक इथेनॉल मिश्रण (E30) के लिए भी मानक निर्धारित किए हैं, जो जैव ईंधन (Biofuels) के उपयोग को बढ़ावा देगा और कच्चे तेल पर निर्भरता को कम करेगा। गौरतलब है कि भारत ने 2025 के लक्ष्य से पहले ही 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
आगे की चुनौतियाँ
इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद, कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अपर्याप्त ईधन भरने के बुनियादी ढांचे और स्पष्ट मूल्य निर्धारण नीतियों की कमी के कारण ऑटोमोबाइल निर्माता फ्लेक्स-फ्यूल वाहन लॉन्च करने में हिचकिचा रहे हैं। देशव्यापी E100 रोलआउट के लिए महत्वपूर्ण निवेश और समय की आवश्यकता होगी। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की वास्तविक दुनिया की दक्षता और दीर्घकालिक इंजन विश्वसनीयता को लेकर भी चिंताएं हैं। उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए समर्पित ईधन भरने वाले बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी, और पुराने वाहनों को बढ़े हुए इथेनॉल सामग्री के साथ समस्याएं हो सकती हैं।
भविष्य की राह
EVs और इथेनॉल की ओर यह तेज़ गति ऊर्जा सुरक्षा, लागत में कमी और पर्यावरणीय लक्ष्यों से प्रेरित है। इसकी सफलता प्रभावी प्रोत्साहनों, बुनियादी ढांचे के तेज़ी से विकास और उपभोक्ताओं की मज़बूत स्वीकार्यता पर निर्भर करेगी। सरकार का सक्रिय दृष्टिकोण भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देता है, जिसका लक्ष्य अधिक ऊर्जा स्वतंत्रता और आयातित कच्चे तेल पर कम निर्भरता है।
