Ministry of Petroleum ने Petroleum (Amendment) Bill, 2026 का ड्राफ्ट पेश किया है। इसमें 1934 के पुराने कानून को बदलते हुए मामूली गलतियों पर क्रिमिनल केस की जगह अब सिविल पेनल्टी का प्रावधान है, लेकिन सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही पर जुर्माना **₹25 करोड़** तक हो सकता है।
भारत सरकार ने एनर्जी सेक्टर के नियमों को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 1934 के पुराने कानून, जहां अधिकतम जुर्माना केवल ₹1,000 था, को बदलकर सरकार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और सख्त सेफ्टी नियमों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
मामूली गलतियों के लिए नया सिस्टम
मौजूदा कानून के तहत छोटी प्रशासनिक गलतियों पर भी क्रिमिनल कार्यवाही का डर बना रहता है, जो कंपनियों के लिए सिरदर्द है। नए ड्राफ्ट के अनुसार, छोटी गलतियों को अब क्रिमिनल केस से बाहर निकालकर 'सिविल पेनल्टी' के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए जुर्माना ₹2.5 करोड़ से शुरू होगा और दूसरी बार गलती करने पर यह बढ़कर ₹5 करोड़ हो जाएगा।
सुरक्षा से समझौता करना पड़ेगा महंगा
सरकार ने सेफ्टी प्रोटोकॉल के मामले में रुख कड़ा रखा है। अगर कोई ऐसी हरकत होती है जिससे पब्लिक सेफ्टी को खतरा हो या क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचे, तो वह अब भी क्रिमिनल कैटेगरी में ही आएगा। इसमें दोषी पाए जाने पर कंपनियों को ₹25 करोड़ तक का जुर्माना और 10 साल तक की कैद हो सकती है।
निवेशकों और कंपनियों के लिए क्या है संकेत?
यह बदलाव कंपनियों के लिए दोधारी तलवार जैसा है। एक तरफ, छोटी प्रशासनिक खामियों के लिए कोर्ट-कचहरी का चक्कर कम होगा। वहीं दूसरी तरफ, सेफ्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर में लापरवाही बरतने पर वित्तीय जोखिम काफी बढ़ गया है।
Ministry of Petroleum and Natural Gas ने इस ड्राफ्ट पर 30 अक्टूबर, 2026 तक जनता और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से सुझाव मांगे हैं। रिफाइनिंग और डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए यह कानून भविष्य में गेम चेंजर साबित हो सकता है।
