India-Singapore Power Corridor: भारत की बड़ी योजना, 3,000 किमी लंबी बिजली लाइन से होगा ऊर्जा का निर्यात

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AuthorNeha Patil|Published at:
India-Singapore Power Corridor: भारत की बड़ी योजना, 3,000 किमी लंबी बिजली लाइन से होगा ऊर्जा का निर्यात

भारत ने सिंगापुर को **2,000 MW** क्लीन एनर्जी सप्लाई करने के लिए **3,000 किलोमीटर** लंबे पावर ट्रांसमिशन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा है। ईस्ट एशिया समिट में चर्चा के बाद अब इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की बारीकियों पर निवेशकों की नजरें हैं।

प्रोजेक्ट का स्वरूप

हाल ही में मनीला में आयोजित 20वें ईस्ट एशिया समिट के दौरान पावर मिनिस्टर श्रीपद येसो नाइक ने इस बड़े प्रोजेक्ट का ऐलान किया। यह कॉरिडोर मणिपुर के इंफाल को सीधे सिंगापुर से जोड़ेगा। इस योजना का मकसद दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के पावर ग्रिड को आपस में जोड़ना है, जो भारत की 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी और 'वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड' पहल का हिस्सा है। सिंगापुर का लक्ष्य 2035 तक 6 GW लो-कार्बन बिजली आयात करना है, जिसके लिए यह प्रोजेक्ट एक अहम जरिया साबित हो सकता है।

चुनौतियां और जोखिम

यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चर्चा के दौर में है। इसमें सबसे बड़ी बाधा म्यांमार, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों से होकर गुजरने वाली 3,000 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाने की है।

  • भू-राजनीतिक अस्थिरता: कई देशों से गुजरने के कारण कानूनी और रेगुलेटरी मंजूरी लेना एक टेढ़ी खीर है।
  • तकनीकी बाधाएं: इतनी लंबी दूरी के लिए HVDC (High Voltage Direct Current) टेक्नोलॉजी की भारी लागत और ट्रांसमिशन के दौरान बिजली का नुकसान (Energy Loss) बड़ा सवाल है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

अभी किसी भी लिस्टेड कंपनी के मुनाफे पर इसका तत्काल असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, लंबी अवधि में यह प्रोजेक्ट EPC, केबल निर्माता और पावर इक्विपमेंट सप्लायर्स के लिए बड़े मौके खोल सकता है। फिलहाल, निवेशकों को 'साउथ एशिया फोरम फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर रेगुलेशन' की स्टडी और आगे के समझौतों पर नजर रखनी चाहिए। यह एक लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट है, जिसमें निवेश का रिस्क काफी ज्यादा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.