सरकार का यह फैसला देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरों तक ईंधन की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस नई नीति के तहत, देश के ऊर्जा संसाधनों के आवंटन (allocation) में एक अहम बदलाव किया गया है।
अब देश की रिफाइनरियों को LPG का उत्पादन अधिकतम करने का आदेश मिला है। इस अतिरिक्त उत्पादन (incremental output) को केवल सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL), और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) – को ही घरेलू उपभोग (domestic consumption) के लिए भेजना होगा। खास बात यह है कि प्रोपेन और ब्यूटेन जैसे महत्वपूर्ण घटकों को पेट्रोकेमिकल उत्पादन में इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होगी। इसका सीधा मकसद है कि देश के करोड़ों घरों में खाना पकाने के ईंधन की कोई कमी न हो।
हालांकि, यह कदम भारत के तेजी से बढ़ते पेट्रोकेमिकल सेक्टर के लिए चिंता का सबब बन सकता है। यह सेक्टर अपने विस्तार (expansion) के लिए इन्हीं घटकों पर निर्भर करता है। भारत की महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं कि 2030 तक वैश्विक पेट्रोकेमिकल बाजार में बड़ा हिस्सा हासिल किया जाए, लेकिन नए आदेश से फीडस्टॉक (feedstock) की कमी हो सकती है। इससे रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और आईओसीएल (IOCL) जैसी बड़ी कंपनियों के विस्तार plans पर असर पड़ सकता है।
यह देखना महत्वपूर्ण है कि भारत अपनी LPG की जरूरत का करीब 90% आयात करता है, जो इसे भू-राजनीतिक (geopolitical) जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाता है। देश की LPG भंडारण क्षमता (storage capacity) भी काफी कम है, लगभग 10 लाख टन, जबकि मासिक मांग 30 लाख टन से अधिक है। यह स्थिति इसे मध्य पूर्व (Middle East) और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण मार्गों से आने वाली सप्लाई में किसी भी रुकावट के प्रति और भी कमजोर बनाती है।
सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के कम मार्केट वैल्यूएशन से भी नाखुश है। यह निर्णय उनकी लाभप्रदता (profitability) से अधिक सामाजिक उद्देश्यों (social objectives) को प्राथमिकता देने की सरकार की नीति को दर्शाता है, जो कि भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में हमेशा से देखने को मिली है।
वैश्विक स्तर पर कई कंपनियां जहां पेट्रोकेमिकल्स से ज्यादा मार्जिन कमा रही हैं, वहीं भारतीय रिफाइनरियों को अब घरेलू सप्लाई पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया गया है। इससे लंबे समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धा (global competition) में पिछड़ने का खतरा हो सकता है। भविष्य में, सरकार वैकल्पिक पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की तलाश कर सकती है या LPG आयात के स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास कर सकती है, शायद अमेरिका से भी खरीद बढ़ाए। हालांकि, LPG को एक महत्वपूर्ण ट्रांजीशन फ्यूल (transition fuel) माना जाता है, लेकिन भारत का दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्य (long-term energy vision) गैर-कार्बन स्रोतों से चलने वाली बिजली की ओर इशारा करता है।