पावर सेक्टर में बंपर तेजी: कमाई और ऑर्डर बुक बनी वजह
भारत का पावर सेक्टर इन दिनों शानदार वापसी कर रहा है. कंपनियों के नतीजे सुधर रहे हैं, नए निवेश आ रहे हैं और सरकारी नीतियों से भी मदद मिल रही है. यह तेजी बताती है कि कंपनियां अब ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर रही हैं और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग भी लगातार बनी हुई है.
इन वजहों से बढ़ी रफ्तार: शानदार कमाई और बढ़ती ऑर्डर बुक
कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया:
- Hitachi Energy India 6% बढ़कर ₹35,495 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.
- Siemens Energy India 9% चढ़कर ₹3,455 पर आ गया, जो उसके 52-हफ्ते के हाई के करीब है.
- GE Vernova T&D India भी 9% उछलकर ₹4,800 के स्तर के पास पहुंच गया.
यह तेजी कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन का नतीजा है. GE Vernova T&D India ने रिकॉर्ड ऑर्डर बुकिंग की है और ₹1,000 करोड़ से ज्यादा का कैपिटल इन्वेस्टमेंट भी किया है. चौथी तिमाही (Q4FY26) में इसके ऑर्डर 188% बढ़कर ₹8,610 करोड़ हो गए, जिसका मुख्य कारण रिन्यूएबल एनर्जी और हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स रहे.
Siemens Energy India ने भी बताया कि उसकी ऑर्डर बुक 22.2% बढ़कर ₹18,433 करोड़ हो गई है. यह बढ़ोतरी इलेक्ट्रिफिकेशन, डीकार्बोनाइजेशन और एनर्जी सिक्योरिटी की बढ़ती मांग की वजह से हुई है.
निवेशकों की दिलचस्पी साफ दिख रही है. Siemens Energy India के शेयरों में छह गुना ज्यादा ट्रेडिंग हुई, जिसमें करीब 23.7 लाख शेयर बदले गए.
सेक्टर में सुधार और भविष्य की ग्रोथ
एक्सपर्ट्स का कहना है कि टेक्निकल और कमर्शियल लॉस में कमी आने और बिजली की सप्लाई कॉस्ट और मिलने वाले रेवेन्यू के बीच का अंतर कम होने से सेक्टर मजबूत हुआ है. डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (DISCOMs) ने फाइनेंशियल ईयर 25 में मुनाफा कमाया है और उनके बकाया ड्यूज में भी भारी कमी आई है.
SBI Capital Markets का मानना है कि इन सुधारों से थर्मल, न्यूक्लियर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में ग्रोथ की अच्छी नींव पड़ी है. Motilal Oswal Financial Services (MOFSL) ने Siemens Energy को 'BUY' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹3,700 रखा है. MOFSL को लगता है कि रिन्यूएबल एनर्जी, डेटा सेंटर और प्राइवेट सेक्टर के बढ़ते खर्चों से कंपनी को फायदा होगा.
MOFSL का अनुमान है कि 2032 तक ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) सेक्टर में ₹9 लाख करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर हो सकता है, साथ ही ग्लोबल मार्केट में भी मौके बनेंगे. ट्रांसफार्मर बनाने वाली कंपनियों की कमाई FY28 तक अच्छी रहने की उम्मीद है.
डिस्ट्रीब्यूशन में अभी भी चुनौतियां
अच्छे ट्रेंड्स के बावजूद, डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट में कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं, जिनमें लगातार सुधार की जरूरत है. भले ही DISCOMs अब ज्यादा मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन उनकी लंबी अवधि की वित्तीय सेहत रेगुलेटरी निगरानी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर निर्भर करेगी.
इसके अलावा, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, खासकर नई टेक्नोलॉजी वाले, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और लागत बढ़ने जैसी दिक्कतों का सामना कर सकते हैं. ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता या नीतियों में बदलाव भी सेक्टर के विस्तार के लिए जरूरी कैपिटल एक्सपेंडिचर को प्रभावित कर सकते हैं.
आगे भी ग्रोथ की उम्मीद
यह सेक्टर आगे और बढ़ने के लिए तैयार है. ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की योजना है और डिस्ट्रीब्यूशन में लगातार सुधार हो रहा है. एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि लंबी अवधि की एनर्जी डिमांड और रिन्यूएबल एनर्जी व ग्रिड को मॉडर्न बनाने वाली सरकारी पहलों के कारण बड़ी कंपनियों की कमाई लगातार बढ़ती रहेगी. अब फोकस नई कैपेसिटी को जोड़ने और पावर वैल्यू चेन के सभी भागीदारों की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने पर रहेगा.
