भारत में डिजिटल क्रांति के साथ Data Centers की बिजली की मांग में बड़ा उछाल आने वाला है। 2036 तक यह मांग **26 गीगावाट (GW)** तक पहुंचने का अनुमान है, जो रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों के लिए एक बड़े मौके की तरह है।
भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अब भारी मात्रा में बिजली की दरकार है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में डेटा सेंटर्स 2 GW से भी कम बिजली का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन 2036 तक यह आंकड़ा 26 GW के पार जा सकता है। यह केवल एक सामान्य उपयोग की बात नहीं है, बल्कि यह पावर सेक्टर की पूरी तस्वीर बदलने वाला है।
24/7 बिजली की चुनौती
डेटा सेंटर्स को बिना किसी रुकावट के 24/7 बिजली चाहिए, जिसे इंडस्ट्री में 'Round-the-Clock' (RTC) पावर कहते हैं। चूंकि सोलर और विंड पावर हमेशा उपलब्ध नहीं होती, इसलिए अब बड़े पैमाने पर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, जैसे कि बड़ी बैटरी और पंप हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया जा रहा है।
निवेशकों के लिए रडार पर कौन सी कंपनियां?
इस बदलाव के बीच, वे कंपनियां सबसे ज्यादा फायदे में रहेंगी जो रिन्यूएबल जनरेशन और स्टोरेज दोनों में माहिर हैं:
- NTPC, Tata Power, और JSW Energy: ये कंपनियां अब बंडल रिन्यूएबल प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही हैं।
- Larsen & Toubro और Power Grid Corporation of India: ग्रिड अपग्रेडेशन और ट्रांसमिशन के लिए ये कंपनियां अहम भूमिका निभाएंगी।
भविष्य की राह और चुनौतियां
सरकार स्मार्ट मीटरिंग के जरिए पावर नेटवर्क को डिजिटाइज कर रही है ताकि बिजली की बर्बादी रोकी जा सके। हालांकि, निवेशकों को बैटरी स्टोरेज की ऊंची लागत, जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) में देरी और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर के अपग्रेडेशन में होने वाली सुस्ती जैसे रिस्क पर भी पैनी नजर रखनी होगी। आने वाले समय में Power Purchase Agreements (PPAs) में 24/7 सप्लाई की शर्तें तय होना, इस सेक्टर की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर होगा।
