बिजली ग्रिड पर रिकॉर्ड दबाव!
गुरुवार को भारत के पावर ग्रिड ने गर्मी के कारण बढ़ी हुई अभूतपूर्व मांग को पूरा करने के लिए 270.82 गीगावाट (GW) का रिकॉर्ड बिजली उत्पादन किया। यह लगातार चौथा दिन है जब मांग अपने ऑल-टाइम हाई पर है, जो देश के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते दबाव को साफ दिखाता है। दिल्ली में 45.3C तक तापमान पहुंचने के बीच कूलिंग उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से बिजली की खपत में भारी उछाल आया है। ग्रिड ने इस मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो बुधवार के 265.44 GW के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक है।
कोयले का दबदबा और इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतें
भारत की ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य आधार अभी भी कोयला है, जो उत्पादन का 62% हिस्सा है। वहीं, सौर ऊर्जा का योगदान 22% है। पवन और जलविद्युत ऊर्जा का योगदान लगभग 5% है। जीवाश्म ईंधन पर यह भारी निर्भरता भारत के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है, खासकर तब जब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक है।
रिकॉर्ड बिजली उत्पादन के बावजूद, देश के कई हिस्सों में लोगों को अभी भी स्थानीय बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक गर्मी के कारण ट्रांसफार्मर और वितरण लाइनों जैसे पुराने बिजली के उपकरण ओवरलोड हो रहे हैं। अप्रैल से जून के बीच हर साल होने वाली ये हीटवेव, जलवायु परिवर्तन के कारण और अधिक तीव्र, लगातार और लंबी होती जा रही हैं।
सेक्टर का प्रदर्शन और भविष्य का नज़रिया
यह स्थिति भारत में यूटिलिटी और बिजली उत्पादन कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है। कोयले पर बहुत अधिक निर्भर कंपनियों को भारत की ऊर्जा परिवर्तन की राह में लंबी अवधि के नीतिगत जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। वर्तमान स्थिति सभी बिजली उत्पादकों के लिए अल्पावधि में मजबूत मांग का संकेत देती है। हालांकि, भविष्य में कंपनियों का प्रदर्शन क्लीनर ऊर्जा स्रोतों को अपनाने और पीक डिमांड के दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर फेलियर को रोकने के लिए ग्रिड के आधुनिकीकरण में निवेश पर निर्भर करेगा।
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य की चुनौतियां
उत्तर प्रदेश के बांदा में दर्ज 47.6C का उच्च तापमान अत्यधिक परिस्थितियों को दर्शाता है। भारत का ऐतिहासिक उच्चतम तापमान 51C 2016 में दर्ज किया गया था। दुनिया भर के कई शहरों में रिकॉर्ड तापमान दर्ज होने के वैश्विक संदर्भ को देखते हुए, यह संभावना है कि बिजली की मांग, विशेष रूप से कूलिंग के लिए, ऊंची बनी रहेगी। यह लगातार उच्च मांग भारत के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर के लचीलेपन और इसकी दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति की व्यवहार्यता की परीक्षा लेती रहेगी।
