Energy Sector Update: पावर सेक्टर में ग्रीन एनर्जी का बोलबाला, लेकिन स्टील-सीमेंट कंपनियों के सामने मार्जिन का संकट

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Energy Sector Update: पावर सेक्टर में ग्रीन एनर्जी का बोलबाला, लेकिन स्टील-सीमेंट कंपनियों के सामने मार्जिन का संकट

भारत के पावर सेक्टर में एमिशन (Emissions) का ग्राफ फ्लैट रहा है क्योंकि बिजली की बढ़ती मांग अब रिन्यूएबल एनर्जी से पूरी हो रही है। हालांकि, रियल एस्टेट के बूम के चलते स्टील और सीमेंट प्रोडक्शन में **8%** की बढ़ोतरी से कुल एमिशन **3.7%** बढ़ गया है, जो भारी उद्योगों के मार्जिन पर दबाव डाल रहा है।

भारत के ऊर्जा क्षेत्र में पिछले पांच दशकों में पहली बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साल 2024 की शुरुआत से लेकर 2026 के मध्य तक, देश में बिजली की मांग में 7% की बढ़ोतरी हुई, लेकिन कोयले से बिजली उत्पादन में कोई वृद्धि नहीं हुई। इस पूरी मांग की भरपाई सोलर, विंड, न्यूक्लियर और हाइड्रो पावर ने की है। सिर्फ सोलर एनर्जी ने ग्रिड में 44 टेरावाट-घंटे की ऊर्जा जोड़ी है।

भारी उद्योगों के लिए चुनौती

भले ही बिजली क्षेत्र में सुधार हुआ है, लेकिन देश का कुल कार्बन एमिशन 3.7% बढ़ गया है। इसकी मुख्य वजह स्टील और सीमेंट इंडस्ट्री है, जहां एमिशन में 8% का उछाल आया है। यह सीधे तौर पर रियल एस्टेट सेक्टर की तेज रफ्तार से जुड़ा है।

मार्जिन पर भारी दबाव

स्टील और सीमेंट कंपनियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोल की ऊंची कीमतों और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के पास चल रहे संकट के कारण फ्रेट कॉस्ट (Freight Cost) बढ़ने से कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर बुरा असर पड़ रहा है।

आगे की राह

रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड में बेहतर तरीके से ढालने के लिए ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में भारी निवेश की जरूरत है। हालांकि, फॉसिल फ्यूल इंडस्ट्री अभी भी नई कोल-बेस्ड कैपेसिटी और कोल-टू-केमिकल प्रोजेक्ट्स में कैपिटल खर्च कर रही है, जो संकेत देता है कि ट्रेडिशनल एनर्जी अभी भी औद्योगिक आधार का हिस्सा बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.