भारत में बिजली की डिमांड ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। अक्टूबर की शुरुआत में पीक डिमांड **260 GW** तक पहुंच गई, जिससे Indian Energy Exchange पर बिजली की कीमतें आसमान छू रही हैं। देश के **82** पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक क्रिटिकल लेवल से नीचे आ गया है, जिससे थर्मल पावर जनरेशन पर दबाव बढ़ गया है।
भारत में बिजली की खपत जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उसने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 5 अक्टूबर को देश में पीक डिमांड 260 GW के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई। सितंबर से लेकर अक्टूबर के मध्य तक यह डिमांड लगातार 250 GW के ऊपर बनी हुई है, जिसकी मुख्य वजह कम बारिश के कारण सिंचाई की बढ़ती जरूरत और कूलिंग के लिए बिजली का अत्यधिक इस्तेमाल है।
कोयले का घटता स्टॉक
सेक्टर के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की सप्लाई है। 15 अक्टूबर तक घरेलू पावर प्लांट्स में कोयला भंडार घटकर 17.9 मिलियन टन रह गया है, जो महीने की शुरुआत में 18.5 मिलियन टन था। चिंताजनक बात यह है कि देश के 190 में से 82 पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक 'क्रिटिकल' लेवल पर है, यानी वहां जरूरत का 25% से भी कम कोयला बचा है। भारी बारिश के चलते कोयला खदानों से बिजली घरों तक फ्यूल पहुँचाना एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती बन गया है।
मार्केट पर असर
इस संकट का सीधा असर Indian Energy Exchange पर दिख रहा है, जहां बिजली की स्पॉट कीमतें ₹7 प्रति यूनिट के ऊपर बनी हुई हैं। हालांकि यह स्थिति एक्सचेंज और अतिरिक्त क्षमता वाले जनरेटरों के लिए मुनाफे का सौदा हो सकती है, लेकिन कर्ज में डूबी सरकारी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (Discoms) पर इसका बोझ और बढ़ गया है।
आगे की राह
सरकारी योजनाकार अब एक दोतरफा रणनीति पर काम कर रहे हैं। फिलहाल जोर कोयले की लॉजिस्टिक्स सुधारने और थर्मल आउटपुट मैक्सिमाइज करने पर है, लेकिन लंबी अवधि के लिए रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) के विस्तार को भी तेज किया जा रहा है। आने वाले महीनों में ठंड बढ़ने के साथ डिमांड कम होने की उम्मीद है, लेकिन तब तक निवेशकों की नजर पावर प्लांट्स के कोयला स्टॉक और बिजली की कीमतों पर बनी रहेगी।
