भारत में बिजली की खपत अक्टूबर महीने में **159.76 अरब यूनिट** तक पहुंच गई है, जो साल-दर-साल **21.88%** की जबरदस्त बढ़ोतरी है। औद्योगिक गतिविधियों में तेजी के बावजूद, हाइड्रोपावर में गिरावट और कोयले की घटती इन्वेंट्री चिंता का विषय बनी हुई है।
अक्टूबर 2026 में बिजली की खपत में भारी तेजी देखी गई। पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा 131.07 अरब यूनिट था। इस उछाल के पीछे औद्योगिक और कमर्शियल गतिविधियों में सुधार के साथ-साथ त्योहारी सीजन की मांग का बड़ा हाथ है। साथ ही, तापमान अधिक रहने के कारण कूलिंग लोड भी लगातार बना रहा, जिससे ग्रिड पर दबाव बढ़ गया।
हाइड्रोपावर की कमी और थर्मल पावर पर दबाव
बिजली उत्पादन के मिश्रण में बड़ा बदलाव आया है। अल नीनो के प्रभाव से कम बारिश के कारण हाइड्रोपावर जनरेशन में 26% की गिरावट दर्ज की गई। इस कमी को पूरा करने के लिए थर्मल पावर प्लांटों पर निर्भरता बढ़ गई है। कोयले से बिजली उत्पादन में 25.7% का इजाफा हुआ है और कुल उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी बढ़कर 71.7% हो गई है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि ग्रिड को स्थिर रखने के लिए थर्मल पावर क्षमता कितनी महत्वपूर्ण है।
थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का संकट
कोयले पर बढ़ती निर्भरता के कारण फ्यूल सिक्योरिटी पर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई प्लांटों में कोयले का स्टॉक गिरकर मात्र 6 दिन का रह गया है, जबकि इंडस्ट्री का स्टैंडर्ड 19 से 20 दिन का होना चाहिए। यदि आने वाले महीनों में मांग इसी तरह बनी रही, तो सप्लाई चेन की कोई भी बाधा पावर जनरेशन के लिए बड़ा रिस्क बन सकती है।
ग्रोथ आउटलुक और आगे की राह
सप्लाई की चुनौतियों के बीच लॉन्ग-टर्म डिमांड का आउटलुक काफी पॉजिटिव है। रेटिंग एजेंसी ICRA ने FY2026-27 के लिए बिजली की मांग का ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 8.5% कर दिया है, जो पहले 6.5% था। पीक डिमांड भी अक्टूबर में 260.73 गीगावाट के स्तर को छू गई, जो पिछले साल के 210.82 गीगावाट से काफी अधिक है। अब निवेशकों की नजर कोयले के इन्वेंट्री स्तर और थर्मल प्लांटों की यूटिलाइजेशन रेट पर टिकी है।
