सितंबर **2026** में भारत में बिजली की खपत **11.35%** बढ़कर **162.19 बिलियन यूनिट** पर पहुंच गई है। हालांकि बढ़ती डिमांड के बीच **82** थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक खतरनाक स्तर पर गिर गया है, जो बिजली कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
भारत में बिजली की मांग में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। सितंबर 2026 में बिजली की खपत पिछले साल के मुकाबले 11.35% बढ़कर 162.19 बिलियन यूनिट हो गई है। इसका मुख्य कारण भीषण उमस और गर्मी रही, जिसके चलते एयर कंडीशनिंग का इस्तेमाल सामान्य से काफी अधिक रहा।
कोयले का संकट और सप्लाई पर दबाव
मांग तो बढ़ रही है, लेकिन सप्लाई चेन पर संकट के बादल छाए हुए हैं। सितंबर के अंत तक 190 थर्मल पावर प्लांट में से 82 प्लांट में कोयले का स्टॉक 'क्रिटिकल' कैटेगरी में पाया गया, यानी इनके पास जरूरत का 25% से भी कम ईंधन बचा है। कमजोर मानसून के कारण हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से बिजली उत्पादन में कमी आई है, जिससे कोयला आधारित प्लांटों पर बोझ और बढ़ गया है।
पीक पावर डिमांड 269.06 गीगावाट तक पहुंच गई थी, जिसके कारण शाम के समय 7 गीगावाट से ज्यादा की बिजली कटौती देखने को मिली।
बाजार पर असर और निवेशकों के लिए संकेत
1 अक्टूबर 2026 को पावर सेक्टर की प्रमुख कंपनियों जैसे NTPC, Tata Power और Adani Power के शेयरों पर दबाव दिखा। निवेशकों के लिए चिंता का विषय यह है कि कोयले की कमी से इन कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी घट सकती है और लागत में इजाफा हो सकता है। इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट के अनुसार अक्टूबर में भी तापमान सामान्य से अधिक रहने के आसार हैं, जिससे बिजली की डिमांड बनी रहेगी। अब देखना यह होगा कि कंपनियां अपने फ्यूल इन्वेंट्री को कैसे मैनेज करती हैं।
