रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से बिजली ग्रिड पर भारी दबाव
देश में चल रही भयानक हीटवेव (Heatwave) के कारण बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। गुरुवार को, भारत की पीक पावर डिमांड 270.82 गीगावॉट (GW) के पार चली गई, जो पिछले सभी रिकॉर्डों को पीछे छोड़ते हुए लगातार चौथे दिन का नया हाई है। बढ़ती मांग का मुख्य कारण देश के बड़े हिस्से को झुलसा रही भीषण गर्मी है, जिससे एयर कंडीशनर और कूलर जैसे कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ गया है। ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Power) ने सप्लाई को मांग के अनुरूप बनाए रखने का आश्वासन दिया है, लेकिन अधिकारी वर्तमान और अनुमानित भविष्य की मांग पर पैनी नजर रखे हुए हैं। अनुमान है कि जून महीने में बिजली की मांग 283 GW तक पहुंच सकती है।
ऊर्जा मिश्रण और कोयले की स्थिति
गुरुवार को बिजली उत्पादन में थर्मल पावर की हिस्सेदारी 62.8% रही, जबकि सौर ऊर्जा का योगदान 22% रहा। पवन ऊर्जा और जलविद्युत की हिस्सेदारी क्रमशः 5% और 5.8% रही। हालांकि, दिन के समय सौर ऊर्जा 32% तक योगदान दे रही है, लेकिन थर्मल पावर अभी भी मुख्य स्रोत बना हुआ है। सरकार का कहना है कि थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक पर्याप्त है और सप्लाई चेन (Supply Chain) को ठीक से मैनेज किया जा रहा है। हालांकि, सौर ऊर्जा की अनुपस्थिति में भी बढ़ती मांग ग्रिड ऑपरेटरों के लिए एक चुनौती पेश कर रही है।
पिछली मांग के रिकॉर्ड्स और भविष्य का अनुमान
इस साल गर्मियों में बिजली की मांग ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मई 2024 में पीक डिमांड 250 GW तक पहुंची थी, जबकि जून 2025 में पिछला रिकॉर्ड 242.77 GW था। मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले हफ्तों में पीक डिमांड 275 GW के आंकड़े को भी पार कर सकती है। विशेषज्ञ लगातार रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) क्षमता, बैटरी जैसे एनर्जी स्टोरेज (Energy Storage) समाधानों और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर (Transmission Infrastructure) में निवेश की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं ताकि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ग्रिड को विश्वसनीय बनाया जा सके।
भीषण गर्मी का आर्थिक असर
भीषण गर्मी न केवल बिजली ग्रिड के लिए एक परीक्षा साबित हो रही है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा जोखिम पैदा कर रही है। अनुमान है कि 2030 तक अत्यधिक गर्मी के कारण भारत को 150 अरब डॉलर से 250 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है, जो देश की जीडीपी (GDP) को 2.5% से 4.5% तक प्रभावित कर सकता है। इस साल गर्मी का जल्दी और तीव्र आगमन, जिसमें कई जगहों पर तापमान 40°C से ऊपर और कुछ स्थानों पर 48°C तक पहुंच गया है, ने बिजली की खपत को बढ़ा दिया है और पारंपरिक मांग पैटर्न को बाधित कर दिया है। इस स्थिति से निपटने के लिए, सरकार ने जून और जुलाई के लिए सभी पावर प्लांट्स के नियोजित रखरखाव (Planned Maintenance) को टाल दिया है ताकि सप्लाई क्षमता को मजबूत किया जा सके और 283 GW की अनुमानित पीक डिमांड को पूरा किया जा सके।
