India Power Demand: बिजली की मांग **260 GW** के पार, कोयले की किल्लत से पावर प्लांट्स पर बढ़ा दबाव

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Power Demand: बिजली की मांग **260 GW** के पार, कोयले की किल्लत से पावर प्लांट्स पर बढ़ा दबाव

8 सितंबर को भारत में बिजली की पीक डिमांड **260 GW** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। उमस और हाइड्रो पावर उत्पादन में कमी के कारण थर्मल प्लांट्स पर दबाव बढ़ा है, जबकि **58** प्लांट्स में कोयले का स्टॉक काफी कम हो गया है।

भारत का बिजली ग्रिड इस हफ्ते एक बड़ी चुनौती से गुजर रहा है। 8 सितंबर को पीक डिमांड 260 GW दर्ज की गई, जिसकी मुख्य वजह भीषण उमस और अनियमित बारिश है। इसके चलते घरों में कूलिंग और कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है, जिससे पावर सिस्टम पर काफी ज्यादा दबाव बन गया है।

हाइड्रो पावर की घटती हिस्सेदारी

इस संकट की एक बड़ी वजह हाइड्रो पावर उत्पादन में गिरावट है। 1 सितंबर से 8 सितंबर के बीच हाइड्रो पावर का आउटपुट पिछले साल की तुलना में 10.3% तक गिर गया है। इसके चलते अब ग्रिड को संभालने की पूरी जिम्मेदारी कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स पर आ गई है। ये प्लांट्स अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं, जिससे उनके मेंटेनेंस के लिए समय कम मिल रहा है और फ्यूल की खपत भी बढ़ गई है।

कोयले की सप्लाई और लॉजिस्टिक्स की चुनौती

सितंबर की शुरुआत में 58 थर्मल पावर प्लांट्स ने कोयले के बेहद कम स्टॉक की जानकारी दी है। समस्या कोयले की उपलब्धता की नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स की है। मानसून के कारण रेल परिवहन में देरी हो रही है, जिससे कोयला खदानों से पावर प्लांट्स तक माल पहुंचने में दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि, Coal India Limited ने सप्लाई बढ़ाने के लिए काम तेज कर दिया है ताकि स्टॉक को दोबारा भरा जा सके।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोयले का कुल रिजर्व लगभग 123.7 मिलियन टन है, जो करीब 51 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है। इसका मतलब है कि समस्या सिर्फ लोकल डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट की है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि अगर लॉजिस्टिक्स में देरी जारी रही, तो पावर कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ सकता है। उन्हें महंगे स्पॉट मार्केट से बिजली खरीदनी पड़ सकती है, जो उनके मुनाफे पर असर डालेगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि रेल लॉजिस्टिक्स कितनी जल्दी सामान्य होते हैं और प्लांट्स अपना बफर स्टॉक कब तक बना पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.