सितंबर 2026 में भारत में बिजली का घाटा **56 करोड़ यूनिट** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। औद्योगिक मांग बढ़ने और हाइड्रो पावर में कमी के कारण पावर सेक्टर दबाव में है। सरकार के **₹1.86 लाख करोड़** के नए इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज के बावजूद Tata Power और NTPC जैसे शेयरों में बिकवाली दिखी है।
सितंबर 2026 में देश का ऊर्जा क्षेत्र एक बड़ी चुनौती से जूझता दिखा। बिजली की कमी का आंकड़ा 56 करोड़ किलोवाट-घंटे पर पहुंच गया, जो अगस्त 2023 के बाद का सबसे बड़ा अंतर है। औद्योगिक खपत में बेतहाशा बढ़ोतरी ने ग्रिड की क्षमता पर भारी दबाव बना दिया है।
संकट की असली वजह
इस संकट के पीछे कमजोर मानसून बड़ा कारण रहा है, जहां बारिश सामान्य से 12.6% कम रही। इससे हाइड्रो पावर का उत्पादन घट गया और ग्रिड को पूरी तरह से थर्मल पावर पर निर्भर होना पड़ा। थर्मल उत्पादन में पिछले साल की तुलना में 13.3% की बढ़त हुई है, और अब देश की कुल ऊर्जा में थर्मल पावर की हिस्सेदारी 66% से ज्यादा हो गई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि देश के 40% कोयला आधारित प्लांट में फ्यूल स्टॉक बेहद कम स्तर पर है।
पावर कंपनियों पर दवाब
बिजली मंत्रालय ने 112 कैप्टिव थर्मल प्लांट को अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक फुल कैपेसिटी पर चलाने का आदेश दिया है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्लांट को लगातार फुल लोड पर चलाने से मेंटेनेंस और परिचालन लागत बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा।
बाजार का रिएक्शन
सरकार ने भले ही ₹1.86 लाख करोड़ के 'PM-DHARA' स्कीम का ऐलान किया हो, लेकिन निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर रहा। 1 अक्टूबर 2026 को कारोबार के अंत में Tata Power में 1.62%, Adani Power में 1.76% और NTPC के शेयरों में 0.87% की गिरावट दर्ज की गई। मार्केट फिलहाल सरकारी फंड्स से ज्यादा कंपनियों के सामने खड़ी तत्काल परिचालन चुनौतियों और ईंधन की लागत को लेकर चिंतित है।
