Wind Power: दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हब बनने की ओर भारत, रिन्यूएबल सेक्टर में बड़ा बदलाव

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Wind Power: दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हब बनने की ओर भारत, रिन्यूएबल सेक्टर में बड़ा बदलाव

भारत ने **58 GW** विंड पावर कैपेसिटी का आंकड़ा छू लिया है और **2030** तक **107 GW** का लक्ष्य रखा है। इस तेजी से भारत जल्द ही जर्मनी को पीछे छोड़ देगा। जहां घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट में उछाल आ रहा है, वहीं नए रेगुलेटरी बदलाव और पेमेंट रिस्क पर नजर रखना निवेशकों के लिए जरूरी है।

ग्लोबल मार्केट में भारत की बढ़ती धमक

भारत तेजी से रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहा है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विंड एनर्जी मार्केट बनने की राह पर है। वर्तमान में देश की विंड पावर कैपेसिटी 58 GW है, जिसे 2030 तक 107 GW और 2035 तक 155 GW तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। यह आंकड़ा जर्मनी की 77 GW की कैपेसिटी से कहीं अधिक है, जो वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता और एक्सपोर्ट

यह विकास केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश अब मैन्युफैक्चरिंग में भी आत्मनिर्भर बन रहा है। देश में टर्बाइन प्रोडक्शन कैपेसिटी सालाना 24 GW तक पहुंच गई है, जिसमें लोकल वैल्यू एडिशन 70% से 80% के बीच है। इसका असर एक्सपोर्ट आंकड़ों पर भी दिख रहा है, जहां पिछले फाइनेंशियल ईयर में विंड इक्विपमेंट का एक्सपोर्ट ₹12,000 करोड़ के पार निकल गया है। इस दौड़ में Suzlon Energy जैसी घरेलू कंपनियां और Vestas, Siemens Gamesa और GE जैसे इंटरनेशनल खिलाड़ी प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

निवेशकों के लिए चुनौतियां और रेगुलेटरी बदलाव

विकास की इस तस्वीर के साथ कुछ रिस्क भी जुड़े हैं। 31 अगस्त 2026 से लागू CERC के 'थर्ड अमेंडमेंट' ने सेक्टर के लिए नियम सख्त कर दिए हैं। अब विंड और सोलर डेवलपर्स को दी गई 'मस्ट-रन' रियायत खत्म कर दी गई है। नए नियमों के तहत, डेवलपर्स को पावर आउटपुट को शेड्यूल के साथ मैच करना होगा। चूक होने पर अब भारी पेनल्टी लगेगी, जो कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बना सकती है।

इसके अलावा, सरकारी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (DISCOMs) का कमजोर फाइनेंशियल स्वास्थ्य लंबे समय से चिंता का विषय है। पेमेंट में देरी के कारण इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स के कैश फ्लो पर असर पड़ता है। साथ ही, ग्रिड और ट्रांसमिशन की कमी भी प्रोजेक्ट्स की कमीशनिंग में बाधा बन सकती है। आने वाले समय में Windergy India 2026 जैसे इवेंट्स में यह साफ होगा कि कंपनियां इन सख्त नियमों के बीच अपना मार्जिन कैसे मैनेज करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.