LPG Import: भारत का बड़ा प्लान, कोयले से बनेगा नया फ्यूल, इंपोर्ट में भारी कटौती!

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AuthorMehul Desai|Published at:
LPG Import: भारत का बड़ा प्लान, कोयले से बनेगा नया फ्यूल, इंपोर्ट में भारी कटौती!
Overview

भारत सरकार अपनी LPG आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की सोच रही है। इस प्लान के तहत, कोयले से बने डाइमिथाइल ईथर (DME) को LPG के साथ **20%** तक मिलाकर सालाना **63 लाख टन** LPG आयात कम किया जा सकता है। इससे करीब **4.04 अरब डॉलर** की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है।

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LPG इंपोर्ट में बड़ी कटौती की राह

LPG इंपोर्ट में बड़ी कटौती की राह खुल सकती है। एक नई रिपोर्ट बताती है कि LPG में 20% डाइमिथाइल ईथर (DME) मिलाने से सालाना 63 लाख टन LPG आयात घट सकता है। इससे करीब 4.04 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। यह कदम भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बहुत अहम है, खासकर तब जब ग्लोबल उथल-पुथल ने आयातित ईंधन पर हमारी निर्भरता को उजागर किया है। वैसे, भारत का 90% से ज़्यादा LPG मिडिल ईस्ट देशों से आता है।

कोयले से बनेगा DME, BIS का अप्रूवल

इस योजना को भारत के ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) का अप्रूवल भी मिल गया है। BIS ने 20% तक DME-LPG ब्लेंड को मंजूरी दे दी है। इस प्लान में कोयले के गैसीफिकेशन (Coal Gasification) से DME बनाया जाएगा, जो भारत के घरेलू कोयले का इस्तेमाल करेगा। यह इंपोर्टेड LPG का एक बढ़िया विकल्प साबित हो सकता है। ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई की दिक्कतें और कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच, ऐसे घरेलू फ्यूल ऑप्शन और भी आकर्षक होते जा रहे हैं।

प्रोडक्शन की बड़ी चुनौतियां, चीन से मुकाबला

इस प्लान की सफलता का सबसे बड़ा दारोमदार कोयला गैसीफिकेशन पर टिका है। भारत के पास करीब 319 अरब मीट्रिक टन कोयले का भंडार है। लेकिन, भारतीय कोयले में राख की मात्रा ज़्यादा होती है, जिससे गैसीफिकेशन करना ज़्यादा मुश्किल हो जाता है। वहीं, चीन ने कोयला गैसीफिकेशन में भारी निवेश किया है और वह DME प्रोडक्शन में दुनिया में सबसे आगे है। चीन के पास 90% मार्केट शेयर है और उसकी फेसिलिटी सालाना लाखों टन DME बना सकती हैं, जो भारत के छोटे पैमाने के प्रयासों से कहीं ज़्यादा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश की ज़रूरत

DME का उत्पादन बड़े पैमाने पर करने में कई चुनौतियां हैं। BIS ने स्टैंडर्ड तो तय कर दिए हैं, लेकिन भारत में DME के डोमेस्टिक प्रोडक्शन के लिए बड़े निवेश को आकर्षित करने को लेकर एक स्पष्ट सरकारी पॉलिसी की ज़रूरत है। भारत का क्लीन एनर्जी सेक्टर पहले से ही हाई कॉस्ट, अनक्लियर पॉलिसी और डिस्ट्रीब्यूटर्स के फाइनेंशियल इश्यूज से जूझ रहा है। New Era Cleantech जैसी कंपनियां 20,000 करोड़ रुपये का कोयला गैसीफिकेशन कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना बना रही हैं, जो इस नए इंडस्ट्री में निवेश के जोखिम को कम करने के लिए सरकारी मदद मांग रही हैं। हालांकि, 20% DME ब्लेंड मौजूदा LPG इक्विपमेंट के साथ काम कर सकता है, लेकिन ज़्यादा DME या अकेले DME का इस्तेमाल भारत के 33 करोड़ घरों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के विशाल नेटवर्क के लिए नए इक्विपमेंट की ज़रूरत पैदा कर सकता है।

पर्यावरण पर असर और चीन का दबदबा

कोयले से DME बनाना एक विरोधाभास भी पैदा करता है। भले ही DME, LPG से कम पॉल्यूटेंट छोड़ता हो, लेकिन इसे कोयले से बनाने पर भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होता है, जो भारत के रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) को बढ़ावा देने के लक्ष्यों के खिलाफ है। यह कोयला-केंद्रित रणनीति 'स्ट्रैंडेड एसेट्स' (Stranded Assets) का कारण बन सकती है, यानी ऐसे निवेश जो भविष्य में बेकार हो जाएं, अगर दुनिया तेज़ी से डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonization) की ओर बढ़ी या सस्ते ग्रीन फ्यूल आ गए। ग्लोबल DME मार्केट में चीन का दबदबा भारत के लिए एक बड़ी रुकावट है। भारत को इस पर काबू पाने और अपने हाई-एश (High-ash) कोयले को संभालने के तरीके खोजने के लिए महत्वपूर्ण रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) की ज़रूरत होगी।

आगे क्या?

LPG के साथ DME को मिलाकर भारत अपने इंपोर्ट बिल को काफी कम कर सकता है और एनर्जी सिक्योरिटी के लक्ष्यों को हासिल कर सकता है। ब्लेंडिंग के लिए नियम अब मौजूद हैं। लेकिन बड़े पैमाने पर डोमेस्टिक प्रोडक्शन के लिए, भारत को स्पष्ट पॉलिसी, लगातार निवेश, अपने कोयले के लिए बेहतर टेक्नोलॉजी और ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिशन करने के लिए एक मजबूत बिज़नेस प्लान की ज़रूरत होगी। यह उम्मीद करना जल्दबाजी होगी कि LPG इंपोर्ट तुरंत खत्म हो जाएंगे; बल्कि, नज़दीकी भविष्य में और ज़्यादा पायलट प्रोजेक्ट्स और धीरे-धीरे पॉलिसी बदलावों की उम्मीद की जा सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.