भारत अपने **100GW** न्यूक्लियर एनर्जी के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है। सरकार अगले दो दशकों में **2.5 लाख** कुशल प्रोफेशनल्स तैयार करने के लिए IIT और NIT के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रही है।
सरकार देश के टॉप टेक्निकल संस्थानों जैसे IITs और NITs के जरिए न्यूक्लियर एनर्जी ट्रेनिंग को औपचारिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। परमाणु वैज्ञानिक जेबी जोशी की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति इसके लिए एक खास पाठ्यक्रम तैयार कर रही है। अगले 20 वर्षों में 2.5 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत है, जो वर्तमान ट्रेनिंग क्षमता से कहीं ज्यादा है।
100GW के लिए टैलेंट की चुनौती
फिलहाल, न्यूक्लियर प्रोफेशनल्स को ट्रेन करने का जिम्मा भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के पास है। लेकिन इस लक्ष्य को देखते हुए मौजूदा मॉडल नाकाफी है। अनुमानों के मुताबिक, हर 1 गीगावाट न्यूक्लियर कैपेसिटी के लिए लगभग 2,000 स्किल्ड वर्कर की जरूरत होती है। साल 2032 तक कम से कम 13,600 प्रोफेशनल्स की पाइपलाइन तैयार करने के लिए सरकार 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी' बनाने पर भी विचार कर रही है।
प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और निवेशकों के लिए मायने
निवेशकों के लिए न्यूक्लियर सेक्टर एक लॉन्ग-टर्म थीम है, जिसमें ऊंची एंट्री बैरियर और भारी कैपिटल की जरूरत होती है। लार्सन एंड टुब्रो (L&T), भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) जैसी EPC कंपनियों को साइट एग्जीक्यूशन और सेफ्टी के लिए हाईली स्किल्ड लेबर पर निर्भर रहना पड़ता है। अगर एक्सपर्ट्स की कमी रही, तो प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है, जो पहले से ही लंबे समय वाले होते हैं। कौशल विकास की यह पहल प्रोजेक्ट्स में आने वाले 'एग्जीक्यूशन रिस्क' को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
