कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को **20%** से ऊपर ले जाने की योजना बना रहा है। सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा दे रही है, लेकिन इस फैसले से फूड सिक्योरिटी को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
तेल पर निर्भरता कम करने की कवायद
भारत अब पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को 20% (E20) के दायरे से आगे ले जाने की तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने संकेत दिए हैं कि सरकार का मुख्य जोर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को तेजी से अपनाने पर है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं।
ऑटो सेक्टर के लिए चुनौती
इस बदलाव के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपने इंजन तकनीक में बड़े पैमाने पर बदलाव करना होगा। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि इन अपग्रेड्स का आरएंडडी (R&D) और प्रोडक्शन कॉस्ट पर क्या असर पड़ेगा। कंपनियों को बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट की जरूरत होगी, जो सीधे तौर पर उनके मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
फूड सिक्योरिटी पर बढ़ता दबाव
सबसे बड़ी चिंता खाद्य सुरक्षा की है। चीनी और अनाज का उपयोग इथेनॉल बनाने में होने से बाजार में इनकी सप्लाई कम हो सकती है, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ता है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 से अगस्त 2026 के बीच चीनी की खुदरा कीमतों में करीब 44% का उछाल आया है और यह ₹65 प्रति किलो के स्तर तक पहुंच गई है।
ICRIER का सुझाव और लचीली नीति
ICRIER जैसी रिसर्च बॉडीज ने सरकार को सलाह दी है कि इस मामले में एक 'फ्लेक्सिबल फ्रेमवर्क' अपनाना चाहिए। यानी जरूरत पड़ने पर ब्लेंडिंग को अस्थायी रूप से E15 तक कम किया जा सके ताकि खाने की चीजों के दाम स्थिर रहें। निवेशकों को अब सरकार की फीडस्टॉक अलॉटमेंट पॉलिसी और चीनी-अनाज की कीमतों पर बारीक नजर रखनी होगी, क्योंकि यही फैक्टर बायोफ्यूल कंपनियों के भविष्य का रास्ता तय करेंगे।
