Energy Sector Reform: रिन्यूएबल और न्यूक्लियर पावर की ओर भारत का बड़ा कदम, क्या पावर शेयरों में आएगी तेजी?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Energy Sector Reform: रिन्यूएबल और न्यूक्लियर पावर की ओर भारत का बड़ा कदम, क्या पावर शेयरों में आएगी तेजी?

भारत अब आयातित जीवाश्म ईंधन से दूरी बनाकर रिन्यूएबल और न्यूक्लियर एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। बैटरी स्टोरेज की लागत **₹10** से गिरकर **₹4** प्रति यूनिट होने से सेक्टर में नई ऊर्जा आई है। सरकार का पूरा फोकस अब ग्रिड स्टेबिलिटी और नए बुनियादी ढांचे पर है, जो पावर कंपनियों के लिए बड़े अवसर लेकर आया है।

ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव

भारत सरकार अपनी ऊर्जा निर्भरता को कम करने के लिए एक नई रणनीति पर काम कर रही है। पावर सेक्रेटरी पंकज अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में सोलर, विंड, बायोमास और न्यूक्लियर पावर पर मुख्य जोर होगा। इसका मकसद वैश्विक कमोडिटी मार्केट की अस्थिरता और सप्लाई चेन के खतरों से देश को बचाना है।

बैटरी स्टोरेज बना गेम-चेंजर

रिन्यूएबल एनर्जी में सबसे बड़ी चुनौती 'इंटरमिटेंसी' (बिजली की उपलब्धता का अस्थिर होना) रही है, लेकिन अब बैटरी स्टोरेज की कीमतों में भारी गिरावट आई है। साल 2023 में जो कीमत ₹10 प्रति यूनिट थी, वह अब घटकर ₹4 प्रति यूनिट रह गई है। Adani Green, Tata Power, और JSW Energy जैसी कंपनियों के लिए यह हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स को अधिक मुनाफादेह बनाने का बड़ा मौका है। इसके अलावा, सरकार 16,000 MW की पंप स्टोरेज क्षमता पर भी काम कर रही है ताकि ग्रिड को स्थिर रखा जा सके।

इंफ्रास्ट्रक्चर और EPC कंपनियों के लिए अवसर

रिन्यूएबल पावर के विस्तार के लिए एक मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क की जरूरत है। इसी कारण Siemens India, ABB India, KEC International, और Hitachi Energy जैसी EPC और ट्रांसमिशन उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए आने वाला समय बेहद अहम हो सकता है। सरकार की योजना डेटा सेंटर्स और ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट्स के लिए भी फ्लेक्सिबिलिटी मैंडेट्स लाने की है।

2047 तक का बड़ा लक्ष्य

न्यूक्लियर पावर के मामले में सरकार ने 2047 तक 100 GW क्षमता का लक्ष्य रखा है। यह बेस-लोड पावर की समस्या को हल करने में मदद करेगा। निवेशकों के लिए फिलहाल टेंडरिंग की रफ्तार, प्रोजेक्ट्स का एग्जीक्यूशन और सरकारी नीतियों की बारीकियां नजर रखने वाली मुख्य बातें होंगी। कंपनियों की कैपिटल स्पेंडिंग मैनेजमेंट ही तय करेगी कि यह बदलाव उनके नेट प्रॉफिट को कितनी रफ्तार देता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.