Fuel Rationing: प्राइवेट पेट्रोल पंपों पर सरकार का सख्त फरमान, राशनिंग बंद कर फुल सर्विस देने का निर्देश

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Fuel Rationing: प्राइवेट पेट्रोल पंपों पर सरकार का सख्त फरमान, राशनिंग बंद कर फुल सर्विस देने का निर्देश

सरकार ने Reliance Industries और Nayara Energy जैसी प्राइवेट फ्यूल कंपनियों को आदेश दिया है कि वे डीजल-पेट्रोल की राशनिंग तुरंत बंद करें। ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल के **$108 प्रति बैरल** पर बने रहने और मई से लागू प्राइस फ्रीज के कारण कंपनियां घाटे को कम करने के लिए बिक्री सीमित कर रही थीं, लेकिन अब उन्हें बिना रोक-टोक सप्लाई देनी होगी।

पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। ऑइल सेक्रेटरी नीरज मित्तल ने 1 अक्टूबर, 2026 को साफ कर दिया कि सरकार चाहती है कि हर पेट्रोल पंप पर ग्राहकों को बिना किसी रुकावट के फ्यूल मिले। इससे पहले, Reliance Industries और Nayara Energy जैसी कंपनियों ने घाटे से बचने के लिए प्रति ग्राहक 50 से 200 लीटर तक की लिमिट तय कर दी थी।

क्यों मचा है बवाल?

इस संकट की सबसे बड़ी वजह इंटरनेशनल क्रूड ऑइल की कीमतें हैं, जो $108 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जबकि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम मई 2026 से स्थिर हैं। इस प्राइस गैप के कारण प्राइवेट रिफाइनर्स को सरकारी दरों पर फ्यूल बेचना भारी पड़ रहा है।

घाटे का गणित और सरकारी दबाव

मौजूदा स्थिति में बल्क डीजल की तुलना में रिटेल पंपों पर दाम ₹40 प्रति लीटर तक सस्ते मिल रहे हैं, जिससे बल्क ग्राहक भी अब रिटेल पंपों की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि Indian Oil Corporation, BPCL और HPCL जैसी सरकारी कंपनियों को भी तगड़ा झटका लग रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी कंपनियों को डीजल पर प्रति लीटर करीब ₹50 का घाटा उठाना पड़ रहा है।

निवेशकों के लिए चुनौती यह है कि अगर क्रूड की कीमतें इसी तरह ऊंची रहीं, तो प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह की कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बना रहेगा। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार इस सेक्टर को किसी तरह की फिस्कल राहत देती है या ये कंपनियां घाटा सहकर ही काम चलाती रहेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.