Ministry of Power ने 50MW से ज्यादा क्षमता वाले 112 कैप्टिव कोल-बेस्ड प्लांट्स को 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक फुल कैपेसिटी पर चलाने का निर्देश दिया है। इस फैसले से Tata Steel और Vedanta जैसी बड़ी कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
बिजली की किल्लत से निपटने की तैयारी
Ministry of Power ने Electricity Act की आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए 112 कैप्टिव पावर प्लांट्स के लिए यह कड़ा आदेश जारी किया है। साल के आखिरी तीन महीनों में बिजली की बढ़ती मांग और ग्रिड स्टैबिलिटी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
किन कंपनियों पर होगा असर?
इस आदेश का असर Vedanta, Tata Steel, Hindalco Industries, JSW Steel और UltraTech Cement जैसी बड़ी कंपनियों पर पड़ेगा। अब इन कंपनियों को अपनी जरूरत के अलावा बची हुई अतिरिक्त बिजली को नेशनल पावर एक्सचेंज में बेचना होगा। साथ ही, इन कंपनियों को Central Electricity Authority को हर हफ्ते का डेटा देना होगा, जिसमें कोयले का स्टॉक और बिजली बिक्री का ब्योरा शामिल होगा।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि फुल कैपेसिटी पर प्लांट चलाने से फ्यूल की लागत बढ़ सकती है। यदि कंपनियों को बाजार भाव पर अतिरिक्त कोयला खरीदना पड़ता है, तो इससे उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव आ सकता है। हालांकि, एक्सचेंज पर बिजली बेचकर होने वाली कमाई कितनी लागत को कवर कर पाएगी, यह देखना अहम होगा।
इसके अलावा, सरकार ने Tata Power के मुंद्रा स्थित प्लांट के लिए भी आपातकालीन ऑपरेशनल ऑर्डर को साल के अंत तक बढ़ा दिया है, जो बिजली संकट से बचने की सरकार की प्राथमिकता को दिखाता है।
