सरकार ने कमर्शियल कोल ऑक्शन के 16वें राउंड का आगाज कर दिया है। इसमें ओडिसा, महाराष्ट्र, झारखंड और छत्तीसगढ़ के **25** कोयला ब्लॉक्स को नीलामी के लिए रखा गया है, जिससे घरेलू उत्पादन को गति मिलेगी।
नीलामी का मकसद और स्ट्रक्चर
कोयला मंत्रालय (Ministry of Coal) ने देश में कोयले की आयात पर निर्भरता कम करने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। इस बार की नीलामी में 21 पूरी तरह से खोजी गई (fully explored) खदानें और 4 आंशिक रूप से खोजी गई (partially explored) खदानें शामिल हैं। निजी कंपनियों को यहाँ बिना किसी 'एंड-यूज़' प्रतिबंध के माइनिंग करने की छूट दी गई है, जिससे वे खुले बाजार में कोयला बेच सकेंगी।
नई परियोजनाओं पर मुहर
नीलामी के साथ ही सरकार ने पुरानी नीलामियों के 6 विनर्स को 'कोल माइन डेवलपमेंट एंड प्रोडक्शन एग्रीमेंट' सौंप दिए हैं। इनमें तारा, मार्गो वेस्ट, मार्गो ईस्ट, मंडला साउथ, डोंगेरी ताल-II और पीकेओसी (Dip Side) जैसी खदानें शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स में 1,504 मिलियन टन के कुल जियोलॉजिकल रिजर्व का अनुमान है।
इन माइनिंग प्रोजेक्ट्स से करीब ₹1,984 करोड़ का वार्षिक रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है और इनमें ₹1,743 करोड़ का निवेश आएगा। इन परियोजनाओं को हासिल करने वालों में 'द सिंगरेनी कोलियरीज', 'गैलेंट इस्पात' और 'झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग' जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और मौके
FY26 में कैप्टिव और कमर्शियल माइनिंग से कोयला उत्पादन 10.22% बढ़कर 210.46 मिलियन टन हो गया है। हालांकि, तेजी के साथ-साथ कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। निवेशकों को जमीन अधिग्रहण, वन विभाग की मंजूरी (Environmental & Forest clearances) और बुनियादी ढाँचे (Rail/Road connectivity) जैसे कारकों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। लंबी अवधि के मुनाफे के लिए इन मंजूरियों की गति ही तय करेगी कि प्रोजेक्ट्स कितनी जल्दी एक्टिव प्रोडक्शन शुरू कर पाएंगे।
