अमेरिका की वेवर के बाद भी अनिश्चितता
अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों में मिली अस्थायी छूट (waiver) ने भारतीय रिफाइनरियों के लिए ईरानी कच्चे तेल के आयात का रास्ता खोला है। इसका मकसद बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक आपूर्ति की दिक्कतों को कम करना है। हालांकि, इस संभावित आयात को लेकर मिली-जुली खबरें आ रही हैं, जो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार की व्यावहारिक चुनौतियों को उजागर करती हैं। सरकार जहां खरीद प्रक्रिया को सहज बता रही है, वहीं एक महत्वपूर्ण जहाज का रास्ता बदलना और अभी तक किसी क्रूड की डिलीवरी न होना एक जटिल तस्वीर पेश करता है।
जहाज के रास्ते बदलने से पेमेंट पर उठे सवाल
'पिंग शुन' (Ping Shun) नाम के एक जहाज को कथित तौर पर भारत के बजाय चीन की ओर मोड़ दिया गया। शुरुआती रिपोर्टों में इसे पेमेंट संबंधी दिक्कतों से जोड़ा गया था, लेकिन मंत्रालय ने कहा कि बिल ऑफ लैडिंग (bills of lading) में अक्सर अस्थायी मंजिलें दिखाई जाती हैं और व्यावसायिक सुविधा (trade optimization) के लिए जहाजों का मार्ग बदलना आम बात है। यह स्पष्टीकरण बताता है कि कैसे वाणिज्यिक कारक व्यापार योजनाओं को बदल सकते हैं। लेकिन, इस घटना ने सौदों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) जैसी प्रमुख रिफाइनरियों ने अभी तक इस वेवर के तहत ईरानी तेल नहीं खरीदा है। 'पिंग शुन' जहाज का रास्ता बदलना, पेमेंट की संवेदनशीलता और सौदों के समय पर अमल में आने वाली मुश्किलों का संकेत देता है।
LPG की खेप पहुंची, क्रूड का इंतजार
जहां क्रूड ऑयल का इंतजार है, वहीं LPG के मोर्चे पर राहत मिली है। 'सी बर्ड' (Sea Bird) नाम का एक LPG जहाज 2 अप्रैल को मंगलौर पोर्ट पर पहुंचा, जिसमें ईरान से करीब 44,000 टन LPG लाई गई थी। यह क्रूड ऑयल की तुलना में एक अलग तस्वीर दिखाता है, जो शायद वस्तुओं के बीच अमल में आसानी या प्राथमिकता में अंतर को दर्शाता है।
भारत की बदलती ऊर्जा आयात रणनीति
यह सब भारत की ऊर्जा आयात रणनीति में एक बड़े बदलाव का हिस्सा है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस भारत का शीर्ष क्रूड आपूर्तिकर्ता बन गया था, लेकिन अब प्रतिबंधों, अनुपालन और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण रिफाइनरियां अपने स्रोतों में विविधता ला रही हैं। भारत अब मध्य पूर्व, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से आयात बढ़ा रहा है ताकि आपूर्ति की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। इराक और सऊदी अरब जैसे आपूर्तिकर्ता फिर से महत्वपूर्ण हो रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों पर असर
भू-राजनीतिक घटनाओं का क्रूड ऑयल की कीमतों पर भारी असर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें काफी बढ़ी हैं। 2 अप्रैल को ब्रेंट फ्यूचर्स में 7.78% का उछाल देखा गया, जो पिछले महीने में 33.94% की बढ़ोतरी थी।
ईरानी क्रूड आयात के जोखिम
ईरान से क्रूड ऑयल के आयात पर मिला यह अस्थायी वेवर, भले ही राजनीतिक रूप से सुविधाजनक हो, भारतीय रिफाइनरों के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पेश करता है। 'पिंग शुन' जहाज का मार्ग बदलना पेमेंट संवेदनशीलता और ईरानी तेल के साथ काउंटरपार्टी जोखिमों का संकेत देता है। वेवर संकीर्ण खिड़कियां हैं जिनके लिए त्वरित निष्पादन की आवश्यकता होती है, जो प्रतिबंधों की निगरानी वाले अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों से जटिल हो जाती हैं।
आगे क्या?
भारतीय रिफाइनरियां आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, ताकि वैश्विक बाजार की अस्थिरता के बीच निश्चितता बनी रहे। हालांकि ईरानी क्रूड के लिए अस्थायी वेवर एक सीमित सोर्सिंग विकल्प प्रस्तुत करता है, लेकिन पारंपरिक मध्य पूर्वी साझेदारों और अन्य विविध स्रोतों से अधिक स्थिर, कम जोखिम वाली आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।