भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका मिलकर एक साझा 'रीजनल पावर मार्केट' बनाने की तैयारी में हैं। दिसंबर **2026** तक इस प्रोजेक्ट की स्टडी पूरी होने की उम्मीद है, जिससे ग्रिड की स्थिरता और ऊर्जा के बंटवारे में बड़ा बदलाव आएगा।
क्या है मास्टर प्लान?
साउथ एशिया फोरम फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर रेगुलेशन ने एक एकीकृत पावर मार्केट बनाने की पहल शुरू की है। अभी तक ये देश द्विपक्षीय समझौतों पर काम करते थे, लेकिन अब लक्ष्य एक 'सिंगल इंटरकनेक्टेड मार्केट' तैयार करना है, जिससे बिजली की ट्रेडिंग कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी।
क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट?
इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा संसाधनों का बेहतर संतुलन बनाना है। भूटान और नेपाल के पास भारी मात्रा में हाइड्रोपावर क्षमता है, जबकि भारत और बांग्लादेश कोयला और रिन्यूएबल एनर्जी पर निर्भर हैं। ग्रिड जुड़ने से पीक डिमांड के दौरान बिजली की कमी को दूर किया जा सकेगा और महंगे स्टोरेज सेटअप की जरूरत भी कम होगी।
निवेशकों के लिए क्या हैं मौके और जोखिम?
यह पहल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में लंबी अवधि की मांग पैदा करेगी। Power Grid Corporation of India (PGCIL) जैसे बड़े नाम इस तरह के ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स के केंद्र में होंगे। साथ ही, NTPC और NHPC जैसी कंपनियों के लिए क्रॉस-बॉर्डर ट्रेडिंग के नए रास्ते खुल सकते हैं। यह भारत के 'वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड' विजन को भी मजबूती देता है।
हालांकि, निवेशकों को कुछ गंभीर जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए। क्षेत्र में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव प्रोजेक्ट में देरी का कारण बन सकता है। इसके अलावा, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों की आर्थिक स्थिति से जुड़ी अनिश्चितताएं और पेमेंट में देरी की समस्याएं कंपनियों के फाइनेंशियल हेल्थ पर असर डाल सकती हैं। इस मेगा प्रोजेक्ट की सफलता देशों के बीच आपसी रेगुलेटरी और पॉलिसी तालमेल पर निर्भर करेगी।
