भारत का ग्रीन एनर्जी लक्ष्य पूरा होने वाला है! नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता पहुंची **297.36 GW**

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत का ग्रीन एनर्जी लक्ष्य पूरा होने वाला है! नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता पहुंची **297.36 GW**

भारत का नॉन-फॉसिल फ्यूल ऊर्जा क्षमता **297.36 GW** तक पहुँच गया है, जो **300 GW** के लक्ष्य के करीब है। पिछले एक दशक में सोलर और विंड पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी ग्रोथ इस विस्तार का मुख्य कारण है।

Detailed Coverage

ग्रीन एनर्जी में भारत की बड़ी छलांग

भारत एक बड़े एनर्जी माइलस्टोन के करीब खड़ा है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के मुताबिक, देश की नॉन-फॉसिल फ्यूल एनर्जी क्षमता 297.36 GW पर पहुँच गई है। इसमें सोलर, विंड और बायोएनर्जी शामिल हैं। यह 2014 में करीब 75 GW क्षमता से एक बड़ी छलांग है। रिन्यूएबल एनर्जी की ओर यह कदम भारत की पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और कार्बन फुटप्रिंट घटाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

सोलर और विंड एनर्जी में ज़बरदस्त बढ़त

इस विस्तार में सोलर पावर का योगदान सबसे अहम रहा है। 2014 में जहां सिर्फ 2.8 GW सोलर क्षमता थी, वहीं अब यह 162 GW तक पहुँच गई है। विंड एनर्जी की क्षमता 21 GW से बढ़कर 57.4 GW हो गई है। बायोएनर्जी क्षमता भी 8.1 GW से 12 GW तक पहुँच चुकी है। इस बदलाव में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का भी बड़ा हाथ है, जिससे सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 2 GW से 200 GW तक बढ़ी है।

निवेश और भविष्य की राह

इस ग्रोथ को और गति देने के लिए, सरकार 2 नवंबर से 5 नवंबर तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में 'भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026' का आयोजन कर रही है। इस इवेंट का मकसद पॉलिसी लक्ष्यों और इंटरनेशनल कैपिटल के बीच की खाई को पाटना है, जिसके लिए 34 देशों को न्योता भेजा गया है। सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के अगले चरण के लिए पेंशन फंड्स और बड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को लुभाने की कोशिश कर रही है।

हालांकि, क्षमता का विस्तार महत्वपूर्ण है, लेकिन निवेशक इन प्रोजेक्ट्स की प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित करने वाले कई फैक्टर्स पर नज़र रखते हैं। इनमें ज़मीन की उपलब्धता, पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) की स्थिरता और स्टेट डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की समय पर पेमेंट करने की क्षमता शामिल है। इसके अलावा, सोलर और विंड से आने वाली रुक-रुक कर होने वाली सप्लाई का मैनेजमेंट एक टेक्निकल चैलेंज बना हुआ है, जिसके लिए एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस में लगातार निवेश की ज़रूरत होगी।

डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए, मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में भारी बढ़ोतरी आत्मनिर्भरता की ओर इशारा करती है। हालांकि, यह इंडस्ट्री पॉलीसिलिकॉन जैसे रॉ मैटेरियल्स की ग्लोबल प्राइस फ्लक्चुएशन और इम्पोर्टेड कंपोनेंट्स पर लगने वाले बेसिक कस्टम ड्यूटी से प्रभावित हो सकती है। आगामी समिट के नतीजे और लॉन्ग-टर्म फाइनेंसिंग को लेकर खास पॉलिसी अनाउंसमेंट्स रिन्यूएबल एनर्जी वैल्यू चेन में स्टेकहोल्डर्स के लिए अगला महत्वपूर्ण संकेत होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.