सरकार ने देश के फ्यूल सिनेरियो को बदलने का बड़ा फैसला लिया है। 1 अप्रैल 2026 से सभी ऑयल कंपनियों को 20% इथेनॉल (Ethanol) मिश्रित E20 पेट्रोल और कम से कम RON 95 वाला फ्यूल पूरे देश में बेचना होगा।
इस कदम से देश के क्रूड ऑयल (Crude Oil) इम्पोर्ट बिल में भारी कमी आने की उम्मीद है। ₹1.4 लाख करोड़ से ज़्यादा की बचत 2014-15 से इथेनॉल के इस्तेमाल से हो चुकी है। यह भारत के जलवायु लक्ष्यों (Climate Goals) के साथ भी मेल खाता है, क्योंकि इथेनॉल एक क्लीनर-बर्निंग फ्यूल है और इसका उत्पादन देश में ही होता है। साथ ही, गन्ने और मक्के जैसे फसलों की मांग बढ़ने से किसानों को भी फायदा होगा। सरकार ने 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य 2030 से पहले करके 2025-26 तक पूरा करने का पक्का इरादा दिखाया है।
हालांकि, E20 पेट्रोल और RON 95 के इस बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में कुछ चुनौतियां भी हैं। माना जा रहा है कि 2023 के बाद बने ज़्यादातर वाहन E20 के लिए कम्पैटिबल (Compatible) हैं। लेकिन पुराने मॉडलों में 3-7% तक माइलेज कम हो सकता है और इंजन के रबर व प्लास्टिक पार्ट्स पर असर पड़ सकता है। RON 95 की ज़रूरत इसलिए है ताकि इंजन में 'नॉकिंग' (Engine Knocking) की समस्या न हो, जिससे इंजन की परफॉरमेंस पर असर पड़ता है। देश भर के फ्यूल स्टेशनों पर RON 95 वाला E20 पेट्रोल लगातार उपलब्ध कराना एक बड़ी लॉजिस्टिकल चुनौती होगी। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) में बड़े अपग्रेड की ज़रूरत पड़ सकती है।
देश की बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां जैसे Indian Oil, BPCL, HPCL अभी कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं। इन कंपनियों के पास बड़ी रिफाइनिंग क्षमता और फैला हुआ रिटेल नेटवर्क है, जो उन्हें E20 को लागू करने में मदद करेगा। वहीं, Reliance Industries जैसी प्राइवेट कंपनियों का P/E रेश्यो ज़्यादा है, जो उनके डाइवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल को दिखाता है।
सबसे बड़ी चिंता लॉजिस्टिक्स और बढ़े हुए खर्च की है, खासकर फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर। पेट्रोल पंपों पर स्टोरेज और डिस्पेंसिंग सिस्टम को अपग्रेड करने में काफी खर्चा आ सकता है। यह भी संभव है कि RON 95 की ज़रूरत के चलते आम कंज्यूमर्स के लिए पेट्रोल की कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी हो। पुराने वाहनों (2023 से पहले के) में परफॉरमेंस में कमी, इंजन डैमेज और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ सकता है। साथ ही, मक्के जैसी फसलों की इथेनॉल के लिए बढ़ती मांग पर फूड सिक्योरिटी (Food Security) को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
भारत के बायोएनर्जी (Bioenergy) सेक्टर का भविष्य काफी उज्ज्वल दिख रहा है। अनुमान है कि 2030 तक बायोफ्यूल (Biofuel) का उत्पादन दोगुना हो सकता है। एनालिस्ट्स (Analysts) IOCL जैसी कंपनियों को लेकर पॉजिटिव हैं। उनका मानना है कि आने वाले 12 महीनों में शेयर की कीमत ₹185.94 तक जा सकती है। IOCL, BPCL, HPCL जैसी कंपनियों को एनर्जी सेक्टर में स्टेबल और डिविडेंड (Dividend) देने वाली माना जाता है। इस पॉलिसी की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी कुशलता से लागू किया जाता है, पुराने वाहनों के लिए संक्रमण (Transition) को कैसे संभाला जाता है, और कीमतों पर क्या असर पड़ता है।