जेट फ्यूल में इथेनॉल को हरी झंडी! भारत का बड़ा कदम, पर चुनौतियां अनेक

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AuthorNeha Patil|Published at:
जेट फ्यूल में इथेनॉल को हरी झंडी! भारत का बड़ा कदम, पर चुनौतियां अनेक
Overview

भारत सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में इथेनॉल मिलाने की नीति को मंजूरी दे दी है। यह कदम देश के सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) एजेंडे को बढ़ावा देने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। हालाँकि, इस पहल के सामने भारी लागत, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत और कच्चे माल की आपूर्ति जैसी कई महत्वपूर्ण बाधाएं हैं।

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नीति में बदलाव: जेट फ्यूल में इथेनॉल की मंजूरी

सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, 17 अप्रैल, 2026 को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने यह अहम फैसला लिया है, जिससे अब एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में इथेनॉल मिलाया जा सकेगा। इसका मुख्य मकसद देश के 87% आयातित तेल पर निर्भरता को कम करना और विमानन क्षेत्र से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को घटाना है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पहले ही ऑटो फ्यूल में 100% इथेनॉल ब्लेंडिंग का समर्थन कर चुके हैं, जो देशव्यापी ऊर्जा स्वतंत्रता की ओर इशारा करता है। यह नीति क्लीन एविएशन का रास्ता तो दिखाती है, पर SAF के बड़े पैमाने पर उत्पादन की आर्थिक व्यवहार्यता और लागत पर अभी सवाल बने हुए हैं।

वैश्विक SAF लक्ष्य और भारत की स्थिति

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो भारत के SAF के लक्ष्य अभी शुरुआती हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 2027 तक 1%, 2028 तक 2% और 2030 तक 5% SAF मिलाने का लक्ष्य रखा है। वहीं, यूरोपीय यूनियन (EU) के ReFuelEU एविएशन नियम के तहत 2025 तक 2% और 2030 तक 6% SAF का लक्ष्य है। दुनिया भर में Neste और Shell जैसी बड़ी एनर्जी कंपनियां और LanzaTech, Gevo जैसे स्पेशलिस्ट SAF उत्पादन में आगे हैं। डेलॉइट का अनुमान है कि 2040 तक भारत सालाना 8-10 मिलियन टन SAF का उत्पादन कर सकता है, जिसके लिए $70-85 बिलियन के निवेश की ज़रूरत होगी। लेकिन एक बड़ी रुकावट SAF की 2 से 5 गुना ज्यादा कीमत है। इथेनॉल से जेट फ्यूल बनाने की Alcohol-to-Jet (AtJ) विधि भारत के लिए उपयुक्त मानी जा रही है, क्योंकि देश में इथेनॉल की अच्छी-खासी सप्लाई है। इसके बावजूद, गन्ने और मक्के जैसे कच्चे माल की लगातार आपूर्ति एक चिंता का विषय है, जिस पर 'फूड वर्सेज फ्यूल' की बहस और अनिश्चित सप्लाई चेन का भी असर पड़ता है।

मुख्य चुनौतियां: लागत, इंफ्रास्ट्रक्चर, कच्चा माल

इस नीतिगत बदलाव की आर्थिक व्यवहार्यता कई चुनौतियों से भरी है। SAF और पारंपरिक जेट फ्यूल के बीच कीमत का भारी अंतर सीधे एयरलाइंस की ऑपरेटिंग लागत पर असर डालेगा, जो उनके खर्चों का एक बड़ा हिस्सा है। इससे टिकट की कीमतें बढ़ सकती हैं या मुनाफा कम हो सकता है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के मुताबिक, 2025 में SAF की लागत पारंपरिक जेट फ्यूल से 4.2 गुना ज्यादा रहने का अनुमान है। लागत के अलावा, SAF उत्पादन और वितरण के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर विस्तार की ज़रूरत होगी। भारत, इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और मक्के जैसे कृषि उत्पादों पर निर्भर है, जो मौसम और सरकारी नीतियों में बदलावों से प्रभावित होते हैं। इससे कच्चे माल की कमी का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, खाद्य फसलों का इस्तेमाल ईंधन के लिए करने पर खाद्य सुरक्षा और कीमतों में बढ़ोतरी की चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। यूरोप या उत्तरी अमेरिका की तुलना में भारत के मौजूदा SAF मैंडेट्स कम सख्त हैं, जो धीमी गति से इसे अपनाने का संकेत देते हैं। गैसोलीन के लिए भारत के मौजूदा इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम में भी कच्चे माल की अस्थिर कीमतों और उत्पादन के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर आलोचनाएं हुई हैं।

भविष्य का नज़रिया: ऊर्जा सुरक्षा बनाम बाज़ार की हकीकत

इन स्पष्ट चुनौतियों के बावजूद, ATF में इथेनॉल मिलाने का भारत का कदम देश को अपने बढ़ते बायोफ्यूल उद्योग का फायदा उठाने का मौका देता है। भारत अपनी अतिरिक्त इथेनॉल क्षमता का उपयोग करके वैश्विक बाजारों के लिए एक प्रमुख SAF सप्लायर बनने का लक्ष्य रख सकता है। सरकार की PM JI-VAN Yojana जैसी योजनाएं बायोफ्यूल प्रोजेक्ट्स में निवेश आकर्षित करने के लिए बनाई गई हैं। इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) का कार्बन ऑफसेटिंग और रिडक्शन स्कीम फॉर इंटरनेशनल एविएशन (CORSIA) ढांचा, जो 2027 से अनिवार्य होगा, SAF को अपनाने के लिए एक नियामक दबाव प्रदान करता है। भले ही एयरलाइन के वित्तीय मामलों पर तत्काल असर अतिरिक्त लागत के रूप में दिखेगा, तेल आयात पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने जैसे दीर्घकालिक रणनीतिक फायदे महत्वपूर्ण हैं। इस नीति की सफलता उत्पादन तकनीकों में बड़े निवेश, खाद्य फसलों से परे कच्चे माल खोजने और लक्ष्यों को हकीकत में बदलने के लिए एक स्पष्ट, लंबी अवधि की योजना पर निर्भर करेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.