Deepwater Oil Exploration: सरकार का बड़ा दांव, ₹84,084 करोड़ की सब्सिडी से चमकेगा ONGC का भविष्य!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Deepwater Oil Exploration: सरकार का बड़ा दांव, ₹84,084 करोड़ की सब्सिडी से चमकेगा ONGC का भविष्य!

भारत सरकार ने 'समुद्र मंथन' (Samudra Manthan) योजना का ऐलान किया है, जिसके तहत डीपवॉटर ड्रिलिंग की लागत पर **50%** तक की सब्सिडी दी जाएगी। इस स्कीम का लक्ष्य **FY2031** तक **60** रणनीतिक कुओं की खोज कर तेल आयात बिल को कम करना है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 'समुद्र मंथन' पहल के साथ ऊर्जा क्षेत्र में एक नई जान फूंकने की तैयारी कर ली है। ₹84,084 करोड़ के भारी-भरकम बजट वाली इस पॉलिसी का मकसद भारत में तेल और गैस की खोज को रफ्तार देना है। डीपवॉटर ड्रिलिंग एक बेहद जोखिम भरा और महंगा काम रहा है, जिससे कंपनियां अक्सर पीछे हटती थीं, लेकिन यह नई स्कीम इस डर को कम करेगी।

खोज की लागत में कटौती

नई योजना में 56 डीपवॉटर कुओं और 4 स्ट्रैटिग्राफिक कुओं के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। स्ट्रैटिग्राफिक कुओं का खर्च सरकार पूरी तरह उठाएगी ताकि फ्रंटियर इलाकों की जियोलॉजिकल मैपिंग बेहतर हो सके। डीपवॉटर प्रोजेक्ट्स में शुरुआती भारी निवेश की समस्या को दूर कर सरकार अब उन चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी खोज को बढ़ावा देना चाहती है जो पहले घाटे के सौदे लगते थे।

रिकवरी और अनुशासन

सरकारी खजाने की सुरक्षा के लिए इसमें कड़े नियम भी हैं। सब्सिडी का 40% भुगतान तब होगा जब तय गहराई का 40% हिस्सा पूरा हो जाएगा, बाकी भुगतान काम पूरा होने पर मिलेगा। योजना में 'रिकवरी मैकेनिज्म' भी है—जैसे ही प्रोजेक्ट कमर्शियल रूप से सफल होगा (7 साल का उत्पादन या 50% लागत वसूली), सरकार अपना निवेश वापस लेगी। इसके अलावा, प्रति कुआं ₹675 करोड़ और ₹1,350 करोड़ की कैप तय की गई है, जिससे लागत बढ़ने का जोखिम ऑपरेटर के सिर पर ही रहेगा।

कंपनियों के लिए क्या मायने रखता है?

ONGC और Oil India जैसे सरकारी दिग्गज अब डीपवॉटर ब्लॉक्स में अधिक आत्मविश्वास के साथ निवेश कर पाएंगे। इस सरकारी 'वित्तीय बफर' से प्रोजेक्ट्स का इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (IRR) बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि तेल की खोज अनिश्चितता भरा बिजनेस है और सब्सिडी मिलने के बावजूद तकनीकी विफलता का जोखिम बना रहता है। यह स्कीम केवल नई खोजों के लिए है, इसलिए कंपनियों को नई तकनीक का इस्तेमाल करना ही होगा। आगे निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि 60 कुओं की ड्रिलिंग कितनी तेजी से पूरी होती है और इसका उत्पादन पर कितना असर पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.