भारत ने अपनी एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए ₹84,084 करोड़ के 'समुद्र मंथन' मिशन की शुरुआत कर दी है। सरकारी कंपनी ONGC इस बड़े प्रोजेक्ट की अगुवाई कर रही है, जिसके तहत अगले पांच सालों में **87** डीपवॉटर कुओं की ड्रिलिंग की जाएगी।
भारत सरकार ने 31 जुलाई, 2026 को 'समुद्र मंथन नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम' को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य घरेलू हाइड्रोकार्बन उत्पादन को तेजी से बढ़ाना है। वर्तमान में भारत अपनी कुल क्रूड ऑइल जरूरतों का 85% और नेचुरल गैस का करीब 50% आयात करता है, जिसे कम करने के लिए यह मिशन गेम चेंजर साबित हो सकता है।
ONGC का बड़ा निवेश
इस महत्वाकांक्षी योजना में Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) मुख्य भूमिका निभा रही है। कंपनी ने अगले पांच सालों के लिए ₹1 लाख करोड़ के निवेश का रोडमैप तैयार किया है। इस फंड से 87 डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर कुओं की खुदाई की जाएगी। सरकार ने भी इसमें मदद का हाथ बढ़ाते हुए हर खोजी कुएं (exploratory well) के खर्च का 50% हिस्सा (अधिकतम ₹675 करोड़) सब्सिडी के तौर पर देने का फैसला किया है।
वित्तीय मोर्चे पर बात करें तो ONGC मजबूत स्थिति में है। मार्च 2026 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹49,793 करोड़ रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले 30% अधिक है। यह मुनाफ़ा कंपनी को बड़े निवेश के लिए ज़रूरी लिक्विडिटी प्रदान करेगा।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि, यह मिशन ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है, लेकिन निवेशकों को यह समझना होगा कि डीपवॉटर प्रोजेक्ट्स में समय अधिक लगता है। किसी भी खोज से लेकर उत्पादन (extraction) शुरू होने तक 5 से 10 साल का लंबा समय लग सकता है।
इसके अलावा, कंपनी के सामने अपने पुराने ऑइल फील्ड्स में प्रोडक्शन घटने की भी चुनौती है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि ONGC किस तरह अपने पुराने ऑइल फील्ड्स के मार्जिन को बनाए रखते हुए इस नए हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड प्रोजेक्ट को मैनेज करती है। ड्रिलिंग की प्रगति और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ही इस मिशन की कामयाबी तय करेगा।
