मोदी सरकार ने फ्लोटिंग सोलर (Floating Solar) क्षमता को बढ़ावा देने के लिए 'प्रधानमंत्री सूर्य सरोज योजना' को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत प्रति मेगावॉट (MW) **₹1 करोड़** की सब्सिडी दी जाएगी। हालांकि, इस पहल का मकसद पारंपरिक सोलर प्लांट के साथ लागत के अंतर को कम करना है, लेकिन कई राज्यों ने अंतिम दिशानिर्देशों के इंतजार में अपने टेंडर (Tender) रोक दिए हैं। वहीं, एक हालिया APTEL के फैसले से प्रोजेक्ट विवादों में फोर्स मेजर (Force Majeure) दावों की सुरक्षा को लेकर डेवलपर्स का भरोसा बढ़ा है।
फ्लोटिंग सोलर को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम
केंद्र सरकार ने फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने के लिए 'प्रधानमंत्री सूर्य सरोज योजना' (Pradhan Mantri Surya Sarovar Yojana) की शुरुआत की है। ₹5,070 करोड़ के कुल बजट वाली इस योजना का लक्ष्य 2030-31 फाइनेंशियल ईयर तक 5,000 MW फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करना है। डेवलपर्स को प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार प्रोजेक्ट्स के सफलतापूर्वक चालू होने पर प्रति मेगावॉट (MW) ₹1 करोड़ की सेंट्रल फाइनेंशियल असिस्टेंस (Central Financial Assistance) प्रदान करेगी।
लागत अंतर को पाटने की कोशिश
फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स में आमतौर पर जमीन पर लगने वाले सोलर इंस्टॉलेशन (Ground-mounted solar installations) की तुलना में 25% तक अधिक सेटअप लागत आती है। इसका कारण खास फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म और जटिल एंकरिंग सिस्टम (Anchoring systems) की जरूरत है। यह नई सब्सिडी विशेष रूप से इस लागत के अंतर को कम करने और बिजली की दरों को मानक सोलर प्रोजेक्ट्स के करीब लाने के लिए डिज़ाइन की गई है। नई योजना की एक अहम शर्त यह है कि सभी प्रोजेक्ट्स में कम से कम दो घंटे की अवधि वाली एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (Energy storage systems) को शामिल करना होगा, जिससे डेवलपर्स के लिए ऑपरेशनल कॉम्प्लेक्सिटी (Operational complexity) बढ़ जाती है।
राज्यों ने रोके टेंडर्स, इंडस्ट्री में समायोजन का दौर
इस घोषणा के बाद, कई भारतीय राज्यों ने अपने निर्धारित फ्लोटिंग सोलर टेंडर्स (Floating solar tenders) को टाल दिया है। डेवलपर्स और राज्य एजेंसियां नए प्रोजेक्ट्स पर आगे बढ़ने से पहले केंद्रीय सरकार से अंतिम ऑपरेशनल दिशानिर्देशों (Operational guidelines) का इंतजार कर रही हैं। हालांकि इस रोक से अल्पावधि में मंदी आई है, लेकिन इसे इंडस्ट्री के लिए नए स्टोरेज और सब्सिडी मानदंडों के साथ तालमेल बिठाने का एक समायोजन अवधि माना जा रहा है।
भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
इस सेक्टर में लंबी अवधि की महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं, जिसमें मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में फ्लोटिंग सोलर इंस्टॉलेशन की काफी क्षमता पहचानी गई है। हालांकि, निवेशकों और डेवलपर्स को इन प्रोजेक्ट्स में निहित ऑपरेशनल चुनौतियों (Operational challenges) पर भी विचार करना होगा। जमीन-आधारित सोलर के विपरीत, फ्लोटिंग प्लांट लगातार पानी के संपर्क में रहते हैं, जिससे केबल और ढांचों के लिए रखरखाव की जरूरतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, जैसे-जैसे इंडस्ट्री बढ़ेगी, दो घंटे के एनर्जी स्टोरेज की तकनीकी आवश्यकताओं का प्रबंधन प्रोजेक्ट लाभप्रदता (Project profitability) बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण कारक होगा।
APTEL का फैसला: डेवलपर्स के लिए राहत
नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable energy) क्षेत्र के लिए एक अलग महत्वपूर्ण विकास में, अपीलीय बिजली प्राधिकरण (Appellate Tribunal for Electricity - APTEL) ने VSR सोलर पावर प्राइवेट लिमिटेड (VSR Solar Power Pvt Ltd) और तमिलनाडु बिजली नियामक आयोग (Tamil Nadu Electricity Regulatory Commission) के बीच एक विवाद में हस्तक्षेप किया है। ट्रिब्यूनल ने डेवलपर की याचिका को खारिज करने के आयोग के पिछले फैसले की आलोचना की, जिसमें निर्माण में देरी के कारण के रूप में चक्रवात 'गज' (Cyclone Gaja) के गंभीर मौसम का हवाला दिया गया था। मामले को नए सिरे से समीक्षा के लिए वापस भेजने का APTEL का फैसला फोर्स मेजर सुरक्षा के महत्व को उजागर करता है - ऐसे क्लॉज जो अप्रत्याशित घटनाओं के दौरान कंपनियों को जुर्माने से बचाते हैं।
आगे क्या?
निवेशकों के लिए, तत्काल देखने वाली बात यह है कि राज्य एजेंसियां अंतिम टेंडर दिशानिर्देश कब जारी करती हैं। इस क्षेत्र में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डेवलपर्स एनर्जी स्टोरेज की बढ़ी हुई लागतों को उपलब्ध सरकारी प्रोत्साहनों के साथ कितनी प्रभावी ढंग से संतुलित कर पाते हैं। इसके अतिरिक्त, प्रोजेक्ट निष्पादन (Project execution) चरण के दौरान जोखिमों का निष्पक्ष प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए प्रोजेक्ट समय-सीमा और फोर्स मेजर दावों से संबंधित कानूनी माहौल महत्वपूर्ण होगा।
