भारत सरकार 2026 के सितंबर से एक नई स्कीम शुरू कर रही है। इसके तहत, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (City Gas Distribution) कंपनियों को हर नए घरेलू कनेक्शन पर सस्ती डोमेस्टिक गैस मिलेगी। इस कदम का मकसद वैश्विक तनाव के कारण बढ़ी LPG आयात की ऊंची लागत को कम करना है। यह स्कीम कंपनियों को अपने विस्तार पर लगे पैसों को जल्दी वसूलने में मदद करेगी, जिससे घरों में पाइप्ड गैस के इस्तेमाल में तेजी आएगी।
नई स्कीम का ऐलान
केंद्र सरकार घरेलू रसोई गैस यानी पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की पहुंच को तेज करने के लिए सितंबर 2026 से एक नई प्रोत्साहन योजना ला रही है। इस स्कीम के तहत, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को हर नए बिल वाले घरेलू कनेक्शन पर, जो एक तय सीमा से ऊपर होगा, 200 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (Standard Cubic Meter) अतिरिक्त, कम कीमत वाली, घरेलू स्तर पर उत्पादित गैस मिलेगी।
क्यों उठाया यह कदम?
यह पहल लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के बढ़ते आयात लागत के जवाब में एक रणनीतिक कदम है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण वैश्विक सप्लाई में आई रुकावटों ने ईंधन की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। इसी के चलते, सरकार देश की LPG पर निर्भरता को कम करने के तरीके खोज रही है। आपको बता दें कि भारत अपनी LPG जरूरत का लगभग 60% आयात करता है, जिस पर 2025 में करीब $12 बिलियन का खर्च आया था।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव सिटी गैस वितरकों (City Gas Distributors) के फाइनेंशियल रिटर्न पर पड़ने वाला असर है। मौजूदा मॉडल के अनुसार, इन कंपनियों को एक नया घरेलू कनेक्शन लगाने में खर्च हुए पैसे को वसूलने में लगभग दस साल लगते हैं। सरकार का अनुमान है कि इस नई, सस्ती गैस सप्लाई से पेबैक पीरियड (Payback Period) घटकर करीब तीन साल रह सकता है। विस्तार पर खर्च हुए पैसों की तेज रिकवरी इस सेक्टर की कंपनियों के कैश फ्लो (Cash Flow) और वित्तीय लचीलेपन (Financial Flexibility) में सुधार कर सकती है।
जोखिम और चुनौतियाँ
तेजी से ग्रोथ की संभावनाओं के बावजूद, इस सेक्टर में कई जोखिम और चुनौतियाँ भी हैं। सिटी गैस कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) काफी हद तक सरकार द्वारा आवंटित सस्ती घरेलू गैस, जिसे एडमिनिस्टर्ड प्राइस मैकेनिज्म (APM) गैस कहा जाता है, पर निर्भर करती है। यह आवंटन सरकारी नीतियों में बदलाव के अधीन है, जिसका मतलब है कि कंपनियां अपने इनपुट कॉस्ट (Input Cost) पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं रखती हैं।
इसके अलावा, हालांकि यह पॉलिसी प्रोत्साहन प्रदान करती है, कंपनियों को भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों में पाइपलाइन बिछाने की व्यावहारिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है ताकि पारंपरिक LPG सिलेंडरों से ग्राहकों को पाइप्ड गैस में बदला जा सके। 1 जुलाई 2026 तक, भारत में 1.74 करोड़ (17.4 Million) PNG कनेक्शन थे, जबकि 33.1 करोड़ (331 Million) से अधिक सक्रिय LPG ग्राहक थे। यह एक बड़े संभावित बाजार को दर्शाता है, लेकिन साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) की एक बड़ी चुनौती भी है। इसके अतिरिक्त, भू-राजनीतिक तनाव का जोखिम वैश्विक गैस की कीमतों को प्रभावित करता रहता है, जो उन कंपनियों को प्रभावित कर सकता है जिन्हें स्पॉट मार्केट (Spot Market) से अतिरिक्त सप्लाई लेनी पड़ती है।
निवेशक यह ट्रैक कर सकते हैं कि कंपनियां इन प्रोत्साहनों का उपयोग अपने ग्राहक आधार को कितनी कुशलता से बढ़ाती हैं, बिना किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में देरी के। इस स्कीम की प्रभावशीलता अंततः इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रदाता कितनी जल्दी नए घरों को सिर्फ पाइप लगाने के बजाय सक्रिय, भुगतान करने वाले ग्राहकों में बदलते हैं।
