India LNG Imports: महंगी गैस से बढ़ा बोझ! इम्पोर्ट वॉल्यूम **5%** बढ़ा, बिल पहुंचा **$5.6 अरब**

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India LNG Imports: महंगी गैस से बढ़ा बोझ! इम्पोर्ट वॉल्यूम **5%** बढ़ा, बिल पहुंचा **$5.6 अरब**

भारत के LNG इम्पोर्ट में अप्रैल से जुलाई **2026** के बीच **5%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ग्लोबल स्तर पर स्पॉट गैस की कीमतें **$25** प्रति MMBtu के स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे सरकारी सब्सिडी और इंडस्ट्रियल मार्जिन पर भारी दबाव दिख रहा है।

भारत की LNG की भूख ग्लोबल मार्केट में मची हलचल के बावजूद कम नहीं हुई है। चालू फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती 4 महीनों में देश का LNG इम्पोर्ट वॉल्यूम 5% बढ़ा है, लेकिन कीमतों में उछाल के चलते इसका बिल 25% बढ़कर $5.6 अरब के स्तर पर पहुंच गया है।

किन सेक्टरों की है सबसे ज्यादा डिमांड?

इस मांग को मुख्य रूप से फर्टिलाइजर और सिटी-गैस डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर चला रहे हैं। फर्टिलाइजर कंपनियां यूरिया बनाने के लिए बड़े पैमाने पर गैस का इस्तेमाल करती हैं। चूंकि इस सेक्टर को सरकार की ओर से मोटी सब्सिडी मिलती है, इसलिए ऊंची कीमतों के बावजूद यहां खपत स्थिर बनी हुई है। वहीं, सिटी-गैस कंपनियां घरेलू गैस के प्राथमिकता आवंटन (Priority Allocation) के कारण स्पॉट मार्केट की आग से काफी हद तक सुरक्षित हैं।

स्पॉट मार्केट की आग और निवेशकों के लिए रिस्क

वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण स्पॉट LNG की कीमतें $25 प्रति MMBtu तक पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 35% से 40% हिस्सा स्पॉट मार्केट से खरीदता है, जो उन कंपनियों के लिए खतरे की घंटी है जिनके पास लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स की कमी है।

पेट्रोकेमिकल्स, सिरेमिक्स और ग्लास मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर, जिन्हें घरेलू गैस का सपोर्ट नहीं मिलता, उनकी प्रॉफिटेबिलिटी पर मार पड़ना तय है। निवेशकों को अब इन कंपनियों के आने वाले रिजल्ट्स पर नजर रखनी चाहिए कि वे कैसे इस फ्यूल कॉस्ट के दबाव को हैंडल कर रही हैं। साथ ही, सरकार के फर्टिलाइजर सब्सिडी बिल में होने वाली बढ़ोतरी पर भी बाजार की निगाहें टिकी रहेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.