भारत का LNG आयात अक्टूबर में **2.7 मिलियन टन** के स्तर पर पहुंच गया है। बिजली और फर्टिलाइजर सेक्टर की मांग के चलते इसमें **17.4%** की बड़ी बढ़त दर्ज की गई है।
भारत में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) की मांग में तेजी का दौर जारी है। अक्टूबर के आंकड़ों के मुताबिक, LNG का आयात 17.4% बढ़कर 2.7 मिलियन टन हो गया है। देश में घरेलू उत्पादन मांग के मुकाबले कम पड़ रहा है, जिसके चलते कुल जरूरतों का 52% हिस्सा अब इंपोर्ट से पूरा किया जा रहा है।
पावर और फर्टिलाइजर की बढ़ती भूख
सर्दी आने के साथ ही सौर ऊर्जा के उत्पादन में कमी आती है, जिससे बिजली कंपनियां गैस की तरफ रुख कर रही हैं। फर्टिलाइजर सेक्टर भी अपने उत्पादन लक्ष्य पूरा करने के लिए लगातार गैस का इस्तेमाल कर रहा है। इस स्थिति से Petronet LNG और GAIL (India) जैसी कंपनियों के टर्मिनल और पाइपलाइन वॉल्यूम में उछाल दिख रहा है। हालांकि, आयात पर निर्भरता बढ़ने से फर्टिलाइजर कंपनियों जैसे Coromandel International और Chambal Fertilisers पर इनपुट कॉस्ट और करेंसी फ्लक्चुएशन का दबाव बढ़ सकता है।
सप्लाई और लॉजिस्टिक्स का गणित
सप्लाई के मोर्चे पर कतर (Qatar) से शिपमेंट में सुधार हुआ है, जो अब काफी स्थिर है। अमेरिका फिलहाल भारत के लिए सबसे बड़ा LNG सप्लायर बना हुआ है, जिसने 0.6 मिलियन टन की सप्लाई दी है। गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए सप्लाई चेन का विविधीकरण (Diversification) जोखिमों को कम करने के लिए बेहद जरूरी है।
क्रूड ऑयल का असर
गैस के साथ-साथ क्रूड ऑयल आयात भी रिकॉर्ड 5.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गया है। रूस अभी भी 36% मार्केट शेयर के साथ भारत का सबसे बड़ा सप्लायर है, लेकिन अब रूसी तेल पर फ्रेट कॉस्ट बढ़ने से मिडिल ईस्ट के ऑप्शंस भी किफायती लग रहे हैं। Reliance Industries जैसे रिफाइनर्स अब अपनी खरीद को और अधिक संतुलित कर रहे हैं। निवेशकों को अब देश के करंट अकाउंट डेफिसिट और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के असर पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
