हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के कारण भारत का LNG आयात अगस्त में **2.6 मिलियन टन** के 6 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इस संकट से फर्टिलाइजर और सिटी-गैस कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर भारी दबाव बढ़ने की आशंका है।
आयात में 40% का उछाल
अगस्त 2026 में भारत का LNG आयात पिछले साल के मुकाबले 40% बढ़ गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे भू-राजनीतिक संकट ने पारंपरिक सप्लाई रूट को बाधित कर दिया है, जिसके कारण भारत को मजबूरन स्पॉट मार्केट से महंगी दरों पर गैस खरीदनी पड़ रही है।
कंपनियों के मुनाफे पर संकट
इस संकट की सबसे बड़ी मार GAIL India और Gujarat State Petroleum Corp (GSPC) जैसी कंपनियों पर पड़ रही है। स्पॉट मार्केट में गैस की कीमतें $23 से $24 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MBTU) के स्तर को पार कर गई हैं, जो 2022 के एनर्जी क्राइसिस के बाद सबसे अधिक हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
चूंकि फर्टिलाइजर और सिटी-गैस कंपनियों पर सरकारी प्राइस कैप या सब्सिडी का दबाव होता है, इसलिए वे बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल सकतीं। इसका सीधा असर उनके तिमाही नतीजों (Quarterly Earnings) और मार्जिन पर पड़ना तय है। मार्च से अगस्त 2026 के बीच भारत को अतिरिक्त फॉसिल-फ्यूल आयात के लिए $22 बिलियन का भारी-भरकम भुगतान करना पड़ा है।
सप्लाई रूट में बदलाव
अब भारत कतर जैसे मिडिल ईस्ट के सप्लायर्स के बजाय अमेरिका से गैस आयात बढ़ाने पर जोर दे रहा है। हालांकि, यह कदम एनर्जी सिक्योरिटी के लिए तो जरूरी है, लेकिन स्पॉट मार्केट की अस्थिरता और महंगी गैस कंपनियों की बैलेंस शीट पर लंबे समय तक दबाव बनाए रख सकती है।
